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कहानी - कलयुग का भगवान /short story in hindi for kids

कलयुग का भगवान

एक गांव में सभी लोग चिंता में थे गांव में महामारी फैली हुई थी लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि वह जाएं तो कहां जाएं एक घर में एक औरत की मृत्यु हो गई थी उसी महामारी की वजह से उसका पति अपने 4 साल के बेटे को लेकर ट्रेन में चला किसी ने कहा था कि भगवान के धाम जाकर दर्शन करके आओ तुम्हारी पत्नी चल बसी है।

 इसके मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करना साथ ही भगवान की आंखों में आंखें डाल कर देखोगे तो तुम्हें और तुम्हारे बेटे को बड़ा ही सुकून मिलेगा उसका पति यात्रा के लिए निकल चला जब स्टेशन पर पहुंचा तो एक फूल वाले दुकानदार से फूल खरीद रहा था।

अपने 4 साल के बेटे को छांव में खड़ा किया बाजू वाला जो फूल वाला था वह चिल्लाने लगा फुल बाजू वाले से खरीद रहा है। और छांव मुझसे हटा यहां से अपने  लड़के को इस इंसान ने 4 साल के बेटे। को अपनी गोद में उठा लिया और इस फूल वाले से कहा ऊपरवाला सब देख रहा है  पूरे दिन भर उस फूल वाले से ना किसी ने फूल खरीदें और ना प्रसाद उसका धंधा ही नहीं हुआ

 इस भगवान की महिमा को देखकर बहुत सारे लोग हर दिन लाखों की भीड़ आती दर्शन के लिए और इसी भीड़ में इस आदमी के बेटे क…
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पश्चाताप के आंसू moral story in hindi for kids

पश्चाताप के आंसू एक बार की बात है एक जंगल में शेर शेरनी के बच्चे जंगल में अकेले थे बच्चे भूखे थे भूख से बिलख रहे थे तो वहां से एक गाय जा रही थी तो गाय ने देखा कि बच्चे तो भूखे हैं गाय ने अपना दूध शेर और शेरनी के बच्चों को दूध पिला दिया । 


शाम हो चुकी थी शेर और शेरनी को जंगल में शिकार नहीं मिला था वह दोनों भूखे थे शेर शेरनी ने गाय को देखा वह बहुत खुश हुए शेर शेरनी के बच्चे कुछ कहते तब तक से शेर और शेरनी ने गाय के ऊपर हमला बोल दिया और गाय को मार डाला बाद में बच्चों ने बताया कि आज हम जीवित हैं इस गाय की वजह से जिसे तुमने जान से मार डाला

अगर आज गाय हमें अपना दूध नहीं पिलाती तो आज हम जीवित नहीं होते तब शेर और शेरनी को बहुत ही पश्चाताप हुआ जिसने हमारे बच्चों को जीवन दिया उसे ही हमने मौत दे दी।

शिक्षा - शिक्षा कोई भी कार्य हमें जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए कोई भी कार्य सोच समझ कर करना चाहिए अन्यथा बाद में पश्चाताप के अलावा कुछ भी नहीं मिलता ।




कहानी- गांव का शेर- किसान/Moral story in hindi for class 8

गांव का शेर- किसानयह कहानी एक गांव की है वह गांव जंगल के किनारे बसा हुआ था उस जंगल में बहुत सारे जंगली जानवर रहते थे गांव के लोग जानवरों से बहुत ही परेशान रहते थे।

एक सप्ताह में एक या दो हास्से होते रहते थे कभी किसी की भेड़ बकरी को खा जाते तो कभी छोटे बच्चों को भी ले जाते जिसके कारण गांव के लोग जंगल से बहुत ही परेशान थे लोगों ने यह परेशानी सरकार को भेजी पर वहां से कोई जवाब नहीं आया।

उस गांव में एक किसान रहता था उसका नाम रामशेख था वह बहुत ही साहसी था वह जानवरों से नही डरता था उसकी पत्नी इस दुनिया में नहीं थी लेकिन उसकी एक 10 साल की एक बेटी थी उसका नाम शालिनी था वह अपनी बेटी से बहुत ही प्यार करता था एक दिन रामशेख अपने खेत चला गया दोपहर हो गई लेकिन रामशेख घर वापस नहीं आया ।

वह भूखा ही खेत में काम करता रहा शालिनी घर में अकेली थी उसको लगा कि मेरा बाबू इतनी धूप में घर नहीं आया क्यों ना मैं अपने बाबू के लिए खाना लेकर जाऊं और शालिनी ने एक टिफिन में खाना पैक किया और खेत की ओर चल दिया


शालिनी को खेत पहुंचने में कुछ ही दूर बचा था शालनी ने देखा कि सामने से एक शेर आ रहा है उसने अपने बापू को आवाज लगाई …

कहानी- पत्थर तोड़ने वाला-Moral short story in hindi

पत्थर तोड़ने वाला एक बार की बात है राजा अपने राज्य में भ्रमण कर रहा था उसने एक बड़ा सा एक पुराना पत्थर देखा तो सैनिकों से कहा इस पत्थर को मेरे बगीचे में ले चलो सैनिक उस पत्थर को बगीचे में ले गए राजा ने पूरे राज्य में खबर भेजी ।


जो इस पत्थर को तोड़ेगा उसे 1000 अशरफिया दी जाएंगी लोग दूर दूर से लोग देखने आने लगे पत्थर बहुत बड़ा था तो उसे तोड़ने को कोई भी आगे नहीं हुआ लोग आते गए पत्थर को देखकर लौट जाते।

 उसी राज्य में एक लोहार रहता था तो वह उस पत्थर को देखने गया और उसने राजा से कहा इसको मैं तोड़ सकता हूं तो राजा ने कहा ठीक है अगर तुमने इस पत्थर को तोड़ दिया तो यह इनाम तुम्हें मिलेगा ।

लोहार ने पत्थर को तोड़ना शुरू किया कई दिनों तक पत्थर पर प्रहार करता रहा लेकिन लोहार उस पत्थर को नहीं तोड़ पाया आखिरकार लोहार ने हार मान ली और राजा से कहा माफ करना महाराज मैं इसे नहीं तोड़ पाया और लोहार वहां से अपने घर वापस चला गया।

 अगले दिन एक साधु ने यह खबर सुनी तो वह राजा के पास पहुंचा तो साधु ने पत्थर के पास जाकर देखा तो पत्थर पर दरार आ चुकी थी तो साधु ने कहा महाराज मैं इसे तोड़ सकता हूं तो राजा ने कहा ठीक ह…

कहानी- कौआ की सोंच-moral story in hindi for class 6

कौआ की सोंचएक कौआ था कौआ को एक ही तकलीफ थी वह काला था  एक बार एक साधू  उस पेड़ के गुजर रहा था जिसमें कौआ बैठा हुआ था साधु के गाल पर पानी टपका तो साधु ने ऊपर देखा तो कौआ रो रहा था साधु ने बोला रोता क्यों है कौवा बोला रोऊ नहीं तो क्या करूं यह कोई जीवन है रंग दिया है तो काला ।



साधू :- तू खुश नहीं है कौआ :- तकलीफ ही तकलीफ है जिसके घर पर जा बैठता हूं कांव-कांव करता रहता हूं उड़ाया जाता हूं कोई हमें पालता भी नहीं है आज तक आपने देखा कोई मुझे एक रोटी भी नहीं खिलाई होगी। शराद पर काम आता हूं लोग मुझे जूठा खिलाते हैं ।
साधू :- क्या बनना चाहते हो

कौआ :- मैं एक हंस बनना चाहता हूं क्या रंग है एकदम सफेद शांति का प्रतीक मुझे हंस बना दो
साधू :- चलो मैं आज तुम्हें एक हंस बना देता हूं लेकिन तुम जाकर एक बार हंस से मिल आ  कौआ भागा - भागा गया हंस के पास वाह हंस क्या रंग है तेरा क्या मस्त रहता है तू
हंस :- किसने कहा तुझसे


कौआ :- क्या तू भी खुश नहीं हैं
हंस :- यह क्या रंग है सफेद रंग मरने के बाद लोग पहनते हैं
कौआ :- तू खुश नहीं हैं
हंस :- नहीं
दोनों आए साधु के पास साधू  बोला तेरे हिसाब से हंस तुम्हें  क्या बनना चाहि…

रिस्तो का एहेसास- Short story in hindi

रिस्तो का एहेसासयह कहानी एक लड़के की है जो शहर में नौकरी के लिए इंटरव्यू देने गया जो इंटरव्यू ले रहे थे तो उन्होंने पूछा कि तुम्हारे पिता क्या करते हैं तो लड़के ने बताया कि मेरे पिता एक किसान है वह गांव में खेती करते हैं तो लड़के से फिर पूछा कि तुम भी खेती में काम करते रहते होगे तो लड़के ने कहा मैंने तो खेतों में काम नहीं किया ,इंटरव्यू वाले ने कहा , क्यों  ।


लड़के ने बताया मेरे पिता मुझे हमेशा पढ़ाई करने को ही कहा मुझे काम करने को नहीं कहा इंटरव्यू वालों ने कहा आज आप घर जाइए और एक दिन अपने पिता के साथ खेतों में काम करके आइए और अपना अनुभव हमें बताइए 2 दिन बाद आप वापस आइए तो लड़के ने सोचा कि 2 दिन बाद बुलाया है मुझे तो नौकरी मिल गई लड़का घर गया। 
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एक डब्बे में मिठाई लेकर गया कि मुझे नौकरी तो मिल गई अगले दिन बेटा अपने पिता से जिद करने लगा कि मुझे खेतों में काम करने जाना है और वहां का अनुभव करना है लड़का बहुत उत्साह से गया दिन भर खेतों में काम करके घर वापस आया तो उसे …

चुपचाप- Short film story in hindi

                           "चुपचाप"
"  चुपचाप सब हो जाता है होकर के करके गुजर जाता है ,वो शैतानी काला साया पीछे से आ जाता है ,गुर्दा के ऐसे फटता है जैसे बाज चिड़िया ले जाता है, बदन पर फर्क क्या ही पड़ेगा वो रूह में आग लगाता है ,चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है ,रास्ते पर इज्जत लुटती है रास्ता भी र्थथराता है आंख से आंसू नहीं गिरता कुछ लहू सा  टपक जाता है, चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है, मिलता उसको इंसाफ यहां जो इसके लिए लड़ जाता है, उसके जख्म नासूर बने जो अपने जख्म छुपाता है, चुपचाप सब हो जाता है वह करके गुजर जाता है  "
यह कहानी रुनझुन की मां की कहानी है मां का नाम गीता था रुनझुन के पिता का नाम रजत था यह कहानी शुरू होती है रुनझुन के घर से रुनझुन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी तभी रजत ने टीवी ऑन कर दी इसमें   एक बलात्कार की खबर आ रही थी तभी रजत ने गीता से कहा सुनो रुनझुन का शाम 7:00 बजे का ट्यूशन बंद करा दो कहीं हमारी रुनझुन के साथ कुछ गलत ना हो जाए तो तुम साथ उसे कोचिंग छोड़ने और लेने जाना और रजत ऑफिस चला गया था है 

गीता भी रुनझुन को स्कूल ले जाती…