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             www.hindustory.com

मै दिलीप कुमार हिन्दू स्टोरी (www.hindustory.com) में आपका स्वागत करता हूं और हिन्दू स्टोरी पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद भी देना चाहता हूँ

हिन्दू स्टोरी का उद्देश्य लोगों में हिंदी के प्रति जागरूकता  बढ़ाना है हमारी मातृभाषा हिंदी कहीं दब कर ना रह जाये, लोगों को हिंदी भाषा से जोड़ने के लिए हिन्दू स्टोरी को बनाया गया है हमारा मकसद है लोगों में सकारात्मक लाना


मै हमीरपुर ( उत्तर प्रदेश ) का रहने वाला हूं और शुरुआत में ही मेरी हिंदी भाषा में रुचि रही है मैं एक मध्यवर्ती परिवार से हूँ और हिन्दू स्टोरी मेरी एक पार्ट टाइम वेबसाइट है मेरा सपना है कि एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक बन सकू
जैसे- रदरफोर्ड


दोस्तों आपको जीवन में खुशियां भरने का हिन्दू स्टोरी का हमेशा प्रयास रहाता है और आगे भी  रहेगा आप इस वेबसाइट को रोज पढ़िए और आप सभी से जुड़ी हुई कहानियों से शिक्षा लीजिए ईश्वर आपको सफल बनाए यही हिन्दू स्टोरी की कामना है




 धन्यवाद

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Name- Dileep kumar

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गौतम बुध्द की सीख (Learning of Gautam Buddha)

एक बार की बात है गौतम बुद्ध अपने  शिष्यों के साथ एक गांव से गुजर रहे थे  तभी गौतम बुद्ध को अचानक से प्यास लगी उन्होंने अपने शिष्य से कहा हम सभी लोग इस पेड़ के नीचे आराम कर रहे हैं


 तुम जाओ गांव के पास एक तालाब है वहां से इस घड़े में पानी भरकर ले आओ शिष्य आज्ञाकारी था वह तालाब के पास पहुंचा तो उसने देखा कि उस तालाब पर तो किसान अपने बैलों को स्नान करा रहे हैं 


और लोग तालाब पर कूद कूद स्नान कर रहे है इसके कारण तालाब का पानी तो गंदा था वह सोचने लगा कि इतना गंदा पानी गुरु जी को लेकर जाऊं तो कैसे जाऊं थोड़ी देर इंतजार किया फिर वह अपने गुरूजी के पास वापस पहुंच गया 


जहां गौतम बुध्द एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे और गौतम बुद्ध से कहा माफी चाहता हूं गुरुदेव मैं चाहता था पानी भरकर लाना लेकिन पानी इतना गंदा था कि मैं पानी भर कर नहीं ला पाया गौतम बुद्ध ने उससे कहा चलो अच्छा तुम भी यही आराम कर लो आधे घंटे बाद गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा 

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तुम जाओ इस घड़े में तालाब से पानी भरकर ले आओ बहुत तेज प्यास लगी है शिष्य फिर से तालाब पर पहुंचा तो उसने …

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चुपचाप- Short film story in hindi

                           "चुपचाप"
"  चुपचाप सब हो जाता है होकर के करके गुजर जाता है ,वो शैतानी काला साया पीछे से आ जाता है ,गुर्दा के ऐसे फटता है जैसे बाज चिड़िया ले जाता है, बदन पर फर्क क्या ही पड़ेगा वो रूह में आग लगाता है ,चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है ,रास्ते पर इज्जत लुटती है रास्ता भी र्थथराता है आंख से आंसू नहीं गिरता कुछ लहू सा  टपक जाता है, चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है, मिलता उसको इंसाफ यहां जो इसके लिए लड़ जाता है, उसके जख्म नासूर बने जो अपने जख्म छुपाता है, चुपचाप सब हो जाता है वह करके गुजर जाता है  "
यह कहानी रुनझुन की मां की कहानी है मां का नाम गीता था रुनझुन के पिता का नाम रजत था यह कहानी शुरू होती है रुनझुन के घर से रुनझुन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी तभी रजत ने टीवी ऑन कर दी इसमें   एक बलात्कार की खबर आ रही थी तभी रजत ने गीता से कहा सुनो रुनझुन का शाम 7:00 बजे का ट्यूशन बंद करा दो कहीं हमारी रुनझुन के साथ कुछ गलत ना हो जाए तो तुम साथ उसे कोचिंग छोड़ने और लेने जाना और रजत ऑफिस चला गया था है 

गीता भी रुनझुन को स्कूल ले जाती…