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मां का दुलारा-Short story in hindi

मां का दुलारा

यह कहानी एक मां और उसके बेटे की है मां अपने बेटे से बहुत प्यार करती थी उस बेटे का नाम अरुण था अरुण की बहन गीता थी वह भी अपने भाई से बहुत प्यार करती थी।
मां का दुलारा-Short story in hindi
मां का दुलारा

गीता बड़ी बहन थी। अरुण छोटा था अरुण से छोटी बहन सीता थी तीनों ही बहुत प्यार से रहते थे और अरुण के पिता ऑफिस में काम करते थे मां सबकी देखभाल करती थी मां अरुण को बहुत चाहती थी।


मां का दुलार हमेशा अरुण की तरफ ही रहता था मां के दुलार की वजह से अरुण स्कूल में गलत संगत पकड़ ली धीरे-धीरे अरुण नशा करने लगा मां और पिता से छुपकर कई सारे नशे करने लगा एक दिन उसके पिता को पता चल गया कि तुम्हारा अरुण नशा करने लगा है तो अरुण के पिता ने उसे डांटा तो बीच में मां का दुलार आ गया उसे कम डांट मिली । 



धीरे-धीरे अरुण बिगड़ता जा रहा था अब स्कूल जाता तो स्कूल के बाहर ही घूमता रहता था घरवालों को लगता था कि अरुण स्कूल पढ़ने जाता है गीता और सीता की बात भी नहीं सुनती  थी स्कूल के बाहर मजे से घूमता और शाम में सभी के साथ घर वापस आ जाता अब उसके खर्चे और भी बढ़ गए उसने अपनी मां से रुपए लेकर दोस्तों में खूब खर्चा किया करता था अब उसे एक लड़की भी पसंद आ गई तो उसे हासिल करने के लिए उस लड़की पे 


मां-बाप के रुपए बर्बाद करने लगा लेकिन मां का दुलार कम नहीं हुआ मां का इकलौता पुत्र होने की वजह से मां का प्यार कम नहीं हुआ था और उनकी जो भी गलतियां होती मां उसे छुपा लेती अब ज्यादा ही नशा में पड़ गया था अब उसके खर्चे बढ़ते जा रहे थे पिता की सैलरी भी उसके खर्चे से ज्यादा हो रही थी पिता अरुण से अब परेशान होने लगा


अरुण की गलतियां सुनता तो पिता बहुत गुस्सा होता और उनकी गलतियों के बीच में मां का दुलार आ जाता अब धीरे-धीरे पिता की उम्र लड़ रही थी गीता और सीता की शादी भी करनी थी लेकिन अरुण के खर्चे कम नहीं हो रहे थे अब मां को भी लगने लगा कि अरुण कुछ ज्यादा ही रुपए बर्बाद कर रहा है मां ने अरुण को समझाया लेकिन अरुण अब कहां समझने वाला था अब तो मां को भी पश्चाताप होने लगा कि मेरा ही दुलार मुझे इस मुसीबत में डाल दिया।


शिक्षा - मां-बाप का दुलार हमेशा आगे मां बाप को पश्चाताप 

कराता है । इसलिए हमेशा ज्यादा मां बाप का दुलार हमेशा हानिकारक होता है




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