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चुपचाप- Short film story in hindi

                           "चुपचाप"

"  चुपचाप सब हो जाता है होकर के करके गुजर जाता है ,वो शैतानी काला साया पीछे से आ जाता है ,गुर्दा के ऐसे फटता है जैसे बाज चिड़िया ले जाता है, बदन पर फर्क क्या ही पड़ेगा वो रूह में आग लगाता है ,चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है ,रास्ते पर इज्जत लुटती है रास्ता भी र्थथराता है आंख से आंसू नहीं गिरता कुछ लहू सा  टपक जाता है, चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है, मिलता उसको इंसाफ यहां जो इसके लिए लड़ जाता है, उसके जख्म नासूर बने जो अपने जख्म छुपाता है, चुपचाप सब हो जाता है वह करके गुजर जाता है  "


यह कहानी रुनझुन की मां की कहानी है मां का नाम गीता था रुनझुन के पिता का नाम रजत था यह कहानी शुरू होती है रुनझुन के घर से रुनझुन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी तभी रजत ने टीवी ऑन कर दी इसमें  
एक बलात्कार की खबर आ रही थी तभी रजत ने गीता से कहा सुनो रुनझुन का शाम 7:00 बजे का ट्यूशन बंद करा दो कहीं हमारी रुनझुन के साथ कुछ गलत ना हो जाए तो तुम साथ उसे कोचिंग छोड़ने और लेने जाना और रजत ऑफिस चला गया था है 

गीता भी रुनझुन को स्कूल ले जाती है अगले दिन गीता को बुखार बहुत तेजी से आ जाता है सुबह के 7:00 बजे रुनझुन को स्कूल छोड़ने जाना होता है तो रुनझुन कहती है कि मां तुम दवाई खा लो और सो जाओ मैं अकेली ही स्कूल चली जाऊगी और रुनझुन स्कूल अकेले ही चली जाती है रात के 10:00 बजे रजत का फोन आता है तो गीता फोन उठाती है तभी 

रजत  : गीता तुम फोन क्यों नहीं उठा रही हो 
गीता : मैं सो रही थी मेरी तबीयत ठीक नहीं है
 रजत : रुनझुन तो फोन उठा सकती थी 
गीता : रुनझुन तो कोचिंग में होगी
 रजत : रात के 10:00 बज रहे हैं तुम होश में तो हो
 गीता : रुनझुन - रुनझुन रजत रुनझुन घर में नहीं है
रजत : गीता तुम रुनझुन को पता करो कहीं रुनझुन के साथ कुछ गलत तो नहीं हो गया 

 गीता जल्दी कोचिंग गई कोचिंग में पता किया तो रुुुनझुुुन तो अपनी सहेली नंदनी के साथ 8:00 बजे चली गई थी गीता परेशान नंदिनी के घर गई तो नंदिनी के पिता ने बताया कि नंदिनी घर पर अकेली ही आई थी अब गीता बहुत ज्यादा ही परेशान हो रही थी रुनझुन का फोन स्विच ऑफ बता रहा था तभी रजत का फोन आया गीता रुनझुन मिली क्या नहीं रजत ,रजत मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई रजत मुझे माफ कर दो रजत : गीता तुम कहां हो तुम स्कूल के बाहर मिलो मैं वहीं आ रहा हूं 

गीता नंदिनी के घर से जैसे ही निकली तो कुछ लोगो से पूछा स्कूल यहां से कितनी दूर है तो बताया यहां से काफी दूर है अगर आपको यहां से आटो मिल गया तो 20 मिनट में तुम्हें स्कूल पहुंचा देगा रात के 11:00 बज चुके थे सड़क में सन्नाटा था कुछ दूर चलने के बाद पीछे से गाड़ी गीता के पीछे चली आ रही थी गीता अकेली थी और पीछे से गाड़ी चली आ रही थी

 गीता भागने लगी लेकिन गीता कब तक भागती आगे जाकर गिर गई और वह गाड़ी आगे से घूम कर वापस चली गई  गीता परेशान सड़क से उठी और आगे बढ़ी तो पीछे से गाड़ी आ गई और गीता को ले गई और उसकी इज्जत लुट गई कुछ देर बाद गाड़ी से गीता को बाहर फेंक दिया गीता की इज्जत लुट चुकी थी गीता का फोन बजा देखा तो रुनझुन का फोन आया था 

हेलो मां तुम कहां हो घर पर कोई नहीं है मां तुम रो क्यों रही हो तुम कहां हो मैं  अरुण की बर्थडे पार्टी में चली गई थी मेरा फोन भी बंद हो गया था मां तुम कहां हो तभी रजत अपनी बाइक से गीता के पास आ जाता है गीता का गाड़ी का नंबर बताती है और रजत से कहती है तुम पुलिस स्टेशन ले चलो तब रजत समझाता है 

कि पुलिस स्टेशन जाने का मतलब समझती हो मीडिया सोशल मीडिया हम किसी के सामने मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेंगे और हमारी बेटी रुनझुन 18 साल की है उस पर क्या बीतेगी और रजत कहता है मैं तुमसे उतना ही प्यार करुंगा जितना पहले करता था तुम घर चलो हम इस राज को राज ही रखेंगे और रजत गीता को घर ले जाता है तभी गीता कविता लिखना शुरु करती है

" चुपचाप "😢
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चुपचाप



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