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कहानी- गांव का शेर- किसान/Moral story in hindi for class 8

गांव का शेर- किसान

यह कहानी एक गांव की है वह गांव जंगल के किनारे बसा हुआ था उस जंगल में बहुत सारे जंगली जानवर रहते थे गांव के लोग जानवरों से बहुत ही परेशान रहते थे।
कहानी- गांव का शेर- किसान/Moral story in hindi for class 8
गांव का शेर - किसान

एक सप्ताह में एक या दो हास्से होते रहते थे कभी किसी की भेड़ बकरी को खा जाते तो कभी छोटे बच्चों को भी ले जाते जिसके कारण गांव के लोग जंगल से बहुत ही परेशान थे लोगों ने यह परेशानी सरकार को भेजी पर वहां से कोई जवाब नहीं आया।

उस गांव में एक किसान रहता था उसका नाम रामशेख था वह बहुत ही साहसी था वह जानवरों से नही डरता था उसकी पत्नी इस दुनिया में नहीं थी लेकिन उसकी एक 10 साल की एक बेटी थी उसका नाम शालिनी था वह अपनी बेटी से बहुत ही प्यार करता था एक दिन रामशेख अपने खेत चला गया दोपहर हो गई लेकिन रामशेख घर वापस नहीं आया ।

वह भूखा ही खेत में काम करता रहा शालिनी घर में अकेली थी उसको लगा कि मेरा बाबू इतनी धूप में घर नहीं आया क्यों ना मैं अपने बाबू के लिए खाना लेकर जाऊं और शालिनी ने एक टिफिन में खाना पैक किया और खेत की ओर चल दिया


शालिनी को खेत पहुंचने में कुछ ही दूर बचा था शालनी ने देखा कि सामने से एक शेर आ रहा है उसने अपने बापू को आवाज लगाई बापू बापू बापू बापू जब तक रामशेख के कानों में आवाज पहुंचती तब तक


शेर ने शालिनी के ऊपर हमला बोल दिया रामशेख दौड़ता हुआ आया। तब तक शेर ने शालिनी की जान ले ली थी और वहां से शेर जंगल में चला गया रामशेख दौड़ते हुए शालिनी के पास पहुंचा तो देखा शालिनी मर चुकी थी ।

रामशेख जोर-जोर से रोने लगा और कहने लगा कि आज के बाद इस जंगल में एक भी हास्से नहीं होंगे मैं इस जंगल को ही खत्म कर दूंगा जब तक कि यह जंगल खत्म नहीं होगा मैं अपने घर वापस नहीं जाऊंगा । रामशेख ने शालिनी के शरीर को वहीं पर दफना दिया।

रामशेख ने अपनी कुल्हाड़ी उठाई और पेड़ काटने लगा।
रामशेख ने एक झोपड़ी वहीं पर बना ली और अपना भोजन जंगल के पेड़ पौधों से ही प्राप्त करने लगा हर रोज अपनी कुल्हाड़ी से जंगल के पेड़ को काटने लगा । रामशेख लगातार और नियंत्रण पेड़ काटता रहा ।


उसने अपना लक्ष्य बना लिया था जिस तरह जंगल के जानवरों ने मेरा घर छीन लिया है उसी तरह मैं भी उनका घर छीन लूंगा रामशेख लगातार पेड़ काटता रहा गांव वालों ने रामशेख को समझाया कि इतना बड़ा जंगल है तुम इसे खत्म नहीं कर सकते हो ।

तुम यह काम छोड़ दो लेकिन रामशेख  ने लोगों की बात नहीं मानी वह पेड़ काटना बंद नहीं किया कई साल बीत गए लोग गांव छोड़कर जाने लगे जाते-जाते लोगों ने कहा तुम हमारे साथ चलो अब तो यहां बारिश भी नहीं हो रही है तुम पानी कहां से पियोगे।

अब तुम्हें यहां नहीं रहना चाहिए तुम्हारी जान और भी मुसीबत में हो सकती है लेकिन रामशेख ने लोगों की बात फिर भी नहीं मानी आखिरकार पूरा गांव खाली हो गया एक महीने तक वर्षा नहीं हुई तो जंगल का पानी और तालाबों का  पानी भी सूख गया ।

अब रामशेख प्यासा मरने लगा रामशेख पानी की तलाश में चल दिया कई जगह जंगल में देखा पानी नहीं मिला आगे और भी चला दूर से कुछ चमकता हुआ नजर आया पास जाकर देखा तो वह पानी ही था रामशेख ने अपनी प्यास बुझाई और वह सोचने लगा कि यह पानी कहां से आ रहा है देखा तो यह पानी एक झरने से आ रहा था पानी न बरसने के कारण जानवर भी जंगल छोड़कर दूसरे जंगल में जाने लगे।

धीरे-धीरे पूरा जंगल भी खाली हो गया कई महीनों बाद आकाश में बादल छाए और बहुत तेज बारिश हुई कई दिनों तक बारिश बराबर होती रही जंगल में सभी जगह पानी दिखने लगा गांव के तालाब भी भर गए थे।

गांव के लोग भी वापस आने लगे गांव वालों ने देखा तो देख कर हैरान हो गए देखा कि जंगल मे तो कुछ ही पेड़ पौधे बचे हैं पूरा जंगल रामशेख ने खत्म कर दिया लोगों ने रामशेख की वाह-वाह करने लगे कि अकेले ही एक कुल्हाड़ी से पूरा जंगल काट डाला अब वहां पर खेती होती है। और गांव वालों को जंगली जानवरों से छुटकारा मिल गया सभी गांव वाले वापस आकर रहने लगे।


शिक्षा - अगर हम कोई भी कार्य नियंत्रण करते रहें या लगातार करते रहें तो हमें सफलता जरूर मिलेगी हम यह नहीं कहते कि हमें पेड़ काटना चाहिए हमे तो अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।

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 तुम जाओ गांव के पास एक तालाब है वहां से इस घड़े में पानी भरकर ले आओ शिष्य आज्ञाकारी था वह तालाब के पास पहुंचा तो उसने देखा कि उस तालाब पर तो किसान अपने बैलों को स्नान करा रहे हैं 


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जहां गौतम बुध्द एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे और गौतम बुद्ध से कहा माफी चाहता हूं गुरुदेव मैं चाहता था पानी भरकर लाना लेकिन पानी इतना गंदा था कि मैं पानी भर कर नहीं ला पाया गौतम बुद्ध ने उससे कहा चलो अच्छा तुम भी यही आराम कर लो आधे घंटे बाद गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा 

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