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चुपचाप- Short film story in hindi

                           "चुपचाप"
"  चुपचाप सब हो जाता है होकर के करके गुजर जाता है ,वो शैतानी काला साया पीछे से आ जाता है ,गुर्दा के ऐसे फटता है जैसे बाज चिड़िया ले जाता है, बदन पर फर्क क्या ही पड़ेगा वो रूह में आग लगाता है ,चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है ,रास्ते पर इज्जत लुटती है रास्ता भी र्थथराता है आंख से आंसू नहीं गिरता कुछ लहू सा  टपक जाता है, चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है, मिलता उसको इंसाफ यहां जो इसके लिए लड़ जाता है, उसके जख्म नासूर बने जो अपने जख्म छुपाता है, चुपचाप सब हो जाता है वह करके गुजर जाता है  "
यह कहानी रुनझुन की मां की कहानी है मां का नाम गीता था रुनझुन के पिता का नाम रजत था यह कहानी शुरू होती है रुनझुन के घर से रुनझुन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी तभी रजत ने टीवी ऑन कर दी इसमें   एक बलात्कार की खबर आ रही थी तभी रजत ने गीता से कहा सुनो रुनझुन का शाम 7:00 बजे का ट्यूशन बंद करा दो कहीं हमारी रुनझुन के साथ कुछ गलत ना हो जाए तो तुम साथ उसे कोचिंग छोड़ने और लेने जाना और रजत ऑफिस चला गया था है 

गीता भी रुनझुन को स्कूल ले जाती…

कहानी-चोरी का डर Moral story in hindi for class 7

चोरी का डर 

आज आपके लिए hindustory.com एक बच्चे की कहानी लेकर आया है। मेरा नाम अंकुश है मेरी उम्र 12 वर्ष की है यह कहानी आप हिंदू स्टोरी.com में पढ़ रहे हैं

कहानी-चोरी का डर Moral story in hindi for class 7
चोली का डर


 मैं कक्षा 7 में पढ़ता था मेरा स्कूल घर से 400 मीटर की दूरी में था मुझे पैदल हीं स्कूल जाना पड़ता था एक दिन की बात है सुबह मैं स्कूल पढने गया तो 200 मीटर चल चुका था तो मैंने देखा कि एक सेब का पेड़ लगा हुआ है उसमें से एक ही से पेड़ में लटका हुआ है


मैं इसे तोड़ लेता हूं स्कूल में जाकर खाऊंगा इतना मैं सोच ही रहा था कि एक आदमी अपने घर से निकला तो देखा कि वह पेड़ में पानी डाल रहा है और मैं वहां से स्कूल चला गया लेकिन मेरे दिमाग में तो वह से भी दिख रहा था

मैं स्कूल में सोचता रहा कि उसे मैं कैसे तोडूंगा स्कूल की छुट्टी हुई तो मैंने उसी से के छोड़ने के बारे में सोच रहा था जब मैं पेड़ के पास पहुंचा तो देखा वहां पर कोई नहीं था मैंने उस सेब को ज स ही तोड़ा तो उस घर से एक औरत बाहर निकल कर आई और मुझे रोकने लगी पर मै सेब तो तोड़ चुका था मैं वहां से भागने लगा उस औरत ने अपने पति से बता दिया तो वह आदमी मेरा पीछा करने लगा मैं दौड़ता रहा वह भी मेरा पीछा करता रहा ।

ए लड़के रुक - ए लड़के रुक की आवाज मुझे सुनाई दे रही थी मैं दौड़ता रहा मेरी और मेरे घर की दूरी 100 मीटर की रह गई थी मेरी और उस आदमी की दूरी केवल 50 मीटर की हीे थी

वो मेरा पीछा छोड़ नहीं रहा था तभी पीछे से एक मोटरसाइकिल आ रही थी तो वह आदमी उस मोटरसाइकिल में बैठ गया और मेरा पीछा करने लगा मैं अपने से घर 50 मीटर की दूरी में था

तो वह मेरे पास आ गया तो सड़क छोड़कर दूसरे रास्ते से दौड़ने लगा वहां से और नजदीक था मेरा एक और घर मैं अपने पुराने घर की ओर दौड़ने लगा अब वह मोटरसाइकिल पीछे करके वह सड़क से आ रहा था जब तक वह मेरे पास आता मैं अपने पुराने घर के अंदर पहुंच चुका था

उस आदमी ने मुझे घर के अन्दर जाते हुए नहीं देखा तब जाकर मेरी जान में जान आई और मैंने जोर से सांस ली मैं घबरा सा गया था लेकिन वह आदमी मुझे जानता नहीं था और ना ही मेरे घर को तो मैं बच गया था 2 घंटे तक मैं उस कमरे के अंदर ही बैठा रहा मैं डर सा गया था मैं सोच रहा था कि आज के बाद मैं कभी भी चोरी नहीं करूंगा आज मुझे लग रहा था कि डर क्या होता है उस दिन से मैं कभी भी चोरी नहीं की थी

शिक्षा - हमें  माता-पिता और गुरु की बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए माता पिता और गुरु हमेशा सही बातें बताते हैं उन्हें कभी भी अनसुना करके नहीं भुलाना चाहिए


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