सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कहानी- पत्थर तोड़ने वाला-Moral short story in hindi

पत्थर तोड़ने वाला 

एक बार की बात है राजा अपने राज्य में भ्रमण कर रहा था उसने एक बड़ा सा एक पुराना पत्थर देखा तो सैनिकों से कहा इस पत्थर को मेरे बगीचे में ले चलो सैनिक उस पत्थर को बगीचे में ले गए राजा ने पूरे राज्य में खबर भेजी ।
कहानी- पत्थर तोड़ने वाला-Moral short story in hindi
पत्थर तोड़ने वाला


जो इस पत्थर को तोड़ेगा उसे 1000 अशरफिया दी जाएंगी लोग दूर दूर से लोग देखने आने लगे पत्थर बहुत बड़ा था तो उसे तोड़ने को कोई भी आगे नहीं हुआ लोग आते गए पत्थर को देखकर लौट जाते।

 उसी राज्य में एक लोहार रहता था तो वह उस पत्थर को देखने गया और उसने राजा से कहा इसको मैं तोड़ सकता हूं तो राजा ने कहा ठीक है अगर तुमने इस पत्थर को तोड़ दिया तो यह इनाम तुम्हें मिलेगा ।

लोहार ने पत्थर को तोड़ना शुरू किया कई दिनों तक पत्थर पर प्रहार करता रहा लेकिन लोहार उस पत्थर को नहीं तोड़ पाया आखिरकार लोहार ने हार मान ली और राजा से कहा माफ करना महाराज मैं इसे नहीं तोड़ पाया और लोहार वहां से अपने घर वापस चला गया।

 अगले दिन एक साधु ने यह खबर सुनी तो वह राजा के पास पहुंचा तो साधु ने पत्थर के पास जाकर देखा तो पत्थर पर दरार आ चुकी थी तो साधु ने कहा महाराज मैं इसे तोड़ सकता हूं तो राजा ने कहा ठीक है अगर तुमने इसे तोड़ दिया तो यह इनाम तुम्हें मिलेगा।

साधु ने पत्थर पर प्रहार किया तो तीन ही प्रहार में वह पत्थर टूट गया राजा को यह बात पता चली तो राजा सोच में पड़ गया कि एक साधु ने उस पत्थर को कैसे तोड़ दिया राजा अपने सैनिकों के साथ तुरंत वहीं पर पहुंचा और साधु से पूछा कि तुमने इसे कैसे तोड़ दिया साधु ने बताया कि जैसे सब लोग इसे तोड़ते हैं इसी तरह मैंने भी तीन बार प्रहार किया तो पत्थर टूट गया।

 राजा ने बड़े ही उत्साह के साथ साधु को दरबार में बुलाया और इनाम देने लगा तो साधु ने कहा इसका असली हकदार मैं नहीं वह लोहार है जो कई दिनों तक उस पत्थर पर प्रहार करता रहा और हार मानकर घर वापस चला गया अगर आपकी इजाजत हो तो यह इनाम लोहार को देना चाहता हूं तो राजा ने कहा 

यह कैसे हो सकता है तो साधु ने बताया कि जब मैं उस पत्थर के पास पहुंचा तो उस पत्थर में दरार आ चुकी थी
अगर लोहार दो या तीन प्रहार करता तो वह पत्थर टूट जाता राजा को यह बात समझ में आ गई कि अगर लोहार और हार नहीं मानता तो वह पत्थर कुछ देर बाद टूट जाता राजा ने सैनिकों को आदेश दिया और लोहार को बुलाया गया। लोहार यह इनाम लेकर बहुत खुश हुआ।


 शिक्षा - अगर हम कोई भी काम लगातार करने के बाद हमें उस काम को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए जिस तरह पत्थर टूटने ही वाला था तो लोहार ने उस पत्थर को तोड़ने से हार मान ली थी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गौतम बुध्द की सीख (Learning of Gautam Buddha)

एक बार की बात है गौतम बुद्ध अपने  शिष्यों के साथ एक गांव से गुजर रहे थे  तभी गौतम बुद्ध को अचानक से प्यास लगी उन्होंने अपने शिष्य से कहा हम सभी लोग इस पेड़ के नीचे आराम कर रहे हैं


 तुम जाओ गांव के पास एक तालाब है वहां से इस घड़े में पानी भरकर ले आओ शिष्य आज्ञाकारी था वह तालाब के पास पहुंचा तो उसने देखा कि उस तालाब पर तो किसान अपने बैलों को स्नान करा रहे हैं 


और लोग तालाब पर कूद कूद स्नान कर रहे है इसके कारण तालाब का पानी तो गंदा था वह सोचने लगा कि इतना गंदा पानी गुरु जी को लेकर जाऊं तो कैसे जाऊं थोड़ी देर इंतजार किया फिर वह अपने गुरूजी के पास वापस पहुंच गया 


जहां गौतम बुध्द एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे और गौतम बुद्ध से कहा माफी चाहता हूं गुरुदेव मैं चाहता था पानी भरकर लाना लेकिन पानी इतना गंदा था कि मैं पानी भर कर नहीं ला पाया गौतम बुद्ध ने उससे कहा चलो अच्छा तुम भी यही आराम कर लो आधे घंटे बाद गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा 

ये भी पढे़-पानी और समय की कीमत. /. Water and time . motivational


तुम जाओ इस घड़े में तालाब से पानी भरकर ले आओ बहुत तेज प्यास लगी है शिष्य फिर से तालाब पर पहुंचा तो उसने …

Motivational quotes for students in hindi

Motivational quotes for students in hindi



















चुपचाप- Short film story in hindi

                           "चुपचाप"
"  चुपचाप सब हो जाता है होकर के करके गुजर जाता है ,वो शैतानी काला साया पीछे से आ जाता है ,गुर्दा के ऐसे फटता है जैसे बाज चिड़िया ले जाता है, बदन पर फर्क क्या ही पड़ेगा वो रूह में आग लगाता है ,चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है ,रास्ते पर इज्जत लुटती है रास्ता भी र्थथराता है आंख से आंसू नहीं गिरता कुछ लहू सा  टपक जाता है, चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है, मिलता उसको इंसाफ यहां जो इसके लिए लड़ जाता है, उसके जख्म नासूर बने जो अपने जख्म छुपाता है, चुपचाप सब हो जाता है वह करके गुजर जाता है  "
यह कहानी रुनझुन की मां की कहानी है मां का नाम गीता था रुनझुन के पिता का नाम रजत था यह कहानी शुरू होती है रुनझुन के घर से रुनझुन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी तभी रजत ने टीवी ऑन कर दी इसमें   एक बलात्कार की खबर आ रही थी तभी रजत ने गीता से कहा सुनो रुनझुन का शाम 7:00 बजे का ट्यूशन बंद करा दो कहीं हमारी रुनझुन के साथ कुछ गलत ना हो जाए तो तुम साथ उसे कोचिंग छोड़ने और लेने जाना और रजत ऑफिस चला गया था है 

गीता भी रुनझुन को स्कूल ले जाती…