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चुपचाप- Short film story in hindi

                           "चुपचाप"
"  चुपचाप सब हो जाता है होकर के करके गुजर जाता है ,वो शैतानी काला साया पीछे से आ जाता है ,गुर्दा के ऐसे फटता है जैसे बाज चिड़िया ले जाता है, बदन पर फर्क क्या ही पड़ेगा वो रूह में आग लगाता है ,चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है ,रास्ते पर इज्जत लुटती है रास्ता भी र्थथराता है आंख से आंसू नहीं गिरता कुछ लहू सा  टपक जाता है, चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है, मिलता उसको इंसाफ यहां जो इसके लिए लड़ जाता है, उसके जख्म नासूर बने जो अपने जख्म छुपाता है, चुपचाप सब हो जाता है वह करके गुजर जाता है  "
यह कहानी रुनझुन की मां की कहानी है मां का नाम गीता था रुनझुन के पिता का नाम रजत था यह कहानी शुरू होती है रुनझुन के घर से रुनझुन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी तभी रजत ने टीवी ऑन कर दी इसमें   एक बलात्कार की खबर आ रही थी तभी रजत ने गीता से कहा सुनो रुनझुन का शाम 7:00 बजे का ट्यूशन बंद करा दो कहीं हमारी रुनझुन के साथ कुछ गलत ना हो जाए तो तुम साथ उसे कोचिंग छोड़ने और लेने जाना और रजत ऑफिस चला गया था है 

गीता भी रुनझुन को स्कूल ले जाती…

Thomas Alva Edison story in Hindi

थॉमस एडिसन की बचपन की कहानी


थॉमस एडिसन जब बच्चे थे एक दिन वह स्कूल से घर लौट कर आए और अपनी मां से कहा यह पेपर हमारे टीचर ने तो मैं देने के लिए दिया है मैंने पेपर खोला और पढ़ने लगी तो उनकी आंखें नम हो गई 


Thomas Alva Edison

थॉमस एडीसन की  मां ने थामस एडीसन को गले लगा लिया थॉमस ने पूछा मां इसमें क्या लिखा है मां ने लेटर को खोलकर जोर-जोर से पड़ने लगी और कहने लगी इसमे में लिखा है थॉमस एडिसन बहुत इंटेलिजेंट बच्चा है और इस बच्चे को अब हम नहीं पढ़ा सकते क्योंकि हमारे स्कूल में इतने अच्छे टीचर नहीं हैं

 हम एडवाइज देते हैं कि आप इस बच्चे को घर पर ही पढ़ाई है उस दिन के बाद मां ने थामस एडीसन को घर में ही पढ़ाना शुरू कर दिया थॉमस एडिसन ने मन लगाकर पढ़ाई की और एक वक्त ऐसा आया । अमेरिका के सबसे बड़े अविष्कारक बन गये

उन्होंने  1093 चीजों के अविष्कारक बन गए जैसे बल्ब, बैटरी इत्यादि चीज़ों के अविष्कारक बन चुके थे।

थॉमस एडीसन बहुत बड़े बिजनेसमैन बन चुके थे इस सबके बीच उनकी मां का स्वर्गवास हो गया एक दिन वह घर की सफाई कर रहे थे उन्हें वह पेपर जो पेपर उनके टीचर ने उनकी मां को देने के लिए दिया था वह पेपर मुड़ा हुआ था जब वह पेपर खोलकर देखा तो  उसमें लिखा था आपका बच्चा मानसिक रूप से कमजोर है ।

हमें स्कूल में नहीं पढ़ा सकते आप इसे घर पर ही रखें और उस दिन थामस एडीसन की आंखों में आंसू आ गए और उन्हें लगा कि उनकी मां ने इतना बड़ा काम किया है अगर उनकी मां जो पेपर में लिखा था वह उस दिन पढ  देती तो शायद थॉमस एडीसन आज थॉमस एडीसन नहीं बन पाते शायद उन इतने सारे अविष्कार आज नहीं हो पाते ।
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शिक्षाहम कई बार कुछ ऐसे शब्द कह देते हैं कि वह इंसान अंदर तक टूट जाता है लेकिन हमें ऐसा नहीं करना चाहिए उन्हें विश्वास दिलाना चाहिए शब्दों में बहुत बड़ी ताकत होती है इस बात को मानना चाहिए और सभी से अच्छी बातें करनी चाहिए।















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