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अन्धविश्वास से दूर रहें / moral story in hindi

                  अन्धविश्वास से दूर रहें


एक बार की बात है एक गांव में एक लड़की रहती थी वह अमीर परिवार से थी परंतु फिर भी वह गरीब के साथ में रहती थी वह लड़की बचपन से ही ईश्वर की पूजा करती थी उसे लगता था कि पूजा करने से शायद भगवान उसकी अराधना सुने जब वह 3 वर्ष की थी तब उसकी मां की मृत्यु हो गई थी उससे अपनी मां का प्यार ना मिलकर बड़े भाई और भाभी का प्यार मिला वह कभी अपनों से खुश नहीं रहती थी क्योंकि उसका साथ खुशियों ने कभी नहीं दिया   
God
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उसके पापा के पास बहुत रुपए थे और काफी खेत भी थे लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी वह लड़की अपने पापा से कभी बात तक नहीं करती थी वह लड़की का एक दूसरा भाई था जिसकी शादी नहीं हुई थी वह भाई पापा के साथ में रहता था तो पापा उसे बहुत रुपए देते थे लेकिन जो बड़ा भाई था उसे कभी रुपए नहीं देते थे उसी गरीब भाई ने अपनी बहन को पढ़ाया उस लड़की का पढ़ने में कम और पूजा करने में ज्यादा मन लगता था 

वह सुबह शाम हर रोज पूजा करती थी काफी दिन बीत गए लेकिन कभी उसकी मन्यतें पूरी नहीं हुई उसी लड़की की भाभी भी अच्छे से नहीं बोलती थी वह हमेशा सोचती थी कि आखिर उसके साथ में ऐसा क्यों हो रहा है धीरे-धीरे उसका विश्वास ईश्वर से हटता गया उसने सोचा कि इतने दिनों से ईश्वर की पूजा करते - करते हो गया परंतु मेरी कोई भी इच्छा पूरी नहीं हुई यदि भगवान होता तो मेरी सुनता , भगवान नहीं होते हैं सब लोग झूठ बोलते हैं बेकार में पत्थरों को देवता मानकर पूछते रहते

सबके लिए तो मां-बाप भगवान होते हैं वही ईश्वर का स्वरूप होते हैं वह अपने बच्चों की हर कामना को पूरा करते हैं लेकिन मेरे लिए तो मेरी मां  ही मेरा भगवान थी जो कि वह नहीं है जब मेरी मां नहीं तभी तो मेरी कोई भी इच्छा पूरी नहीं हो रही है आज से मैं पूजा नहीं करूंगी अब मैं सिर्फ पढ़ाई करूंगी तब से उसने खूब मन लगाकर पढ़ाई की ताकि वह अपने गरीब भाई का सिर ऊंचा कर सके आगे चलकर वह एक पुलिस अफसर बन गई उसका बड़ा भाई बहुत खुश हुआ 2 साल बाद उसकी शादी हो गई समय बीतता गया फिर वह भी  बच्चों की मां बन गई

उसके दो लड़के और एक लड़की थी जैसे कि वह स्वयं एक बहन दो भाई थे उसी प्रकार उसके बच्चे थे लेकिन उसने कभी अपने बच्चों को भगवान की पूजा करना कभी नहीं सिखाया और वह हमेशा अपने बच्चों को बताती थी कि भगवान ईश्वर कोई नहीं होता जब तक हम जिंदा है तब तक हम ही तुम्हारे भगवान हैं नहीं तो पत्थरों को पूज कर अपना समय नष्ट ना करना जो सच है उसे कभी दूसरों के कहे अनुसार मत करना और दूसरे लोगों को भी सच्चाई का  ज्ञान देना जरूरी है ईश्वर यही है बस लोग पहचान नहीं कर पाते हैं कि ईश्वर कौन है तभी पत्थरो को पूछते रहते हैं जिन मूर्तियों को खुद इंसान बनाता है वह भला इंसान को कैसे बना सकता


जो अपनी रक्षा ना कर सके वह दूसरों की रक्षा कैसे करेंगे क्योंकि उन मूर्तियों की देखभाल के लिए तो खुद एक पुजारी होता है जब मां-बाप खुश होते हैं तो तभी तो भगवान खुश होते हैं क्योंकि मां-बाप ही ईश्वर का स्वरूप होते हैं ईश्वर को मानना पूजा करना यह सब अंधविश्वास की चीजें हैं जो हम सबको मिलता है वह मां-बाप की देन समझना चाहिए क्योंकि मां-बाप ही हमें इस दुनिया में लाते हैं जो तुम्हारे जीवन हमेश साथ देते हैं उनकी ही सेवा करना ईश्वर की पूजा कहलाती है उसी लड़की ने अपने बच्चों को बहुत अच्छे संस्कार देकर पाल पोस कर बड़ा किया उसके बच्चे हमेशा अपने मां-बाप की सेवा करते थे अपने से बड़ों का सम्मान देते थे और छोटों को प्यार देते थे तीनों बच्चे पढ़ लिखकर वह भी तीनों सरकारी नौकरी में लग गए


शिक्षा  - यह छोटी सी कहानी हमें बहुत बड़ी बात सिखाती है कि अपने आप को कभी कमजोर ना समझे कि हमारे पास पैसे नहीं है तो कुछ नहीं कर सकते आप अपने किस्मत को दोष ना दें कि हमारी किस्मत अच्छी नहीं है क्योंकि किस्मत तुम्हारे हाथों में है जैसा बनाओगे किस्मत वैसे ही बनेगी और अंधविश्वास की चीजों में ध्यान देकर अपना समय नष्ट ना करें वह समय अपने भविष्य को बनाने में उपयोग करें तभी आप का कल्याण हो सकता  है जो सच है उसे सबको बताए और अंधविश्वास की चीजों से दूर रहें



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