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दुःख और सुख का अधिकार moral story in hindi

              दुःख और सुख का अधिकार


एक बार की बात है कि एक गांव में एक राजा रहता था उसकी एक पुत्री थी राजकुमारी का नाम इच्छा था वह एक अच्छे स्कूल में पढ़ने जाती थी और स्कूल के बाद अपने महल में आती थी उसने कभी अपने गांव के लोगों से बातें नहीं की थी
Friendship
Friends ship

 वह सोचती थी कि हमको कुछ भी देखने को नहीं मिलता है हमें पता नहीं चलता है कि दुनिया कैसी है  दुनिया में कैसे लोग हैं और कैसे रहते हैं वह राजकुमारी 12 वर्ष की हो चुकी थी 

एक बार उसने अपने पिताजी से महल के बाहर घूमने की आज्ञा मांगी और बोली कि पापा जी आज हम महल के बाहर खेल खेलना चाहते हैं तो राजा ने कहा ठीक है जाओ जाकर खेलो और दो सिपाही उसकी रेख देख करने के लिए भेज दिए 
Workers
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वह राजकुमारी महल से बाहर आई तो उसने देखा कि कुछ लोग धोती कुर्ता पहने खुदाई कर रहे थे और कुछ लोग रास्ता साफ कर रहे थे तो कुछ लोगो के शरीर में फटे कपड़े भी नहीं है और कुछ लोग फटे पुराने कपड़े पहने थे उस राजकुमारी ने ऐसे लोग तो कभी नहीं देखे थे उसको लगा कि यह लोग बहुत बुरे हैं तभी उसकी नजर एक बाबा पर गई जो डंडी लेकर चल रहे थे अचानक वह गिर पड़े यह सब राजकुमारी देख रही थी पर उस बाबा की कोई सहायता नही की।

थोड़ी देर बाद बाबा के पास एक लड़की आई और उस बाबा को उठाने में सहायता की यह देकर राजकुमारी उस लड़की के पास गई और बोली कि तुम कौन हो और उस बूढ़े को उठाया और तुम्हारा नाम क्या है उस लड़की ने कहा कि मेरा नाम चाहत है और वह बूढ़े बाबा हमारे नहीं हैं पर हम सब की सहायता करते हैं तुम्हारी सहायता करनी हो तो बताओ तब 

राजकुमारी बोली मेरा नाम इच्छा है और एक राजकुमारी भी हूँ तब चाहत ने कहा तो तुम यहाँ क्या कर रही हो तुम अपने महल जाओ तो इच्छा बोली हमें तुम्हारे साथ खेलना है क्या तुम मेरी दोस्त बनोगी तक चाहत ने कहा दोस्त बन सकते हैं 

पर तुम कभी हमारी दोस्ती अमीरी और गरीबी में नही तोलो गी इच्छा बोली ठीक है उन दोनों में दोस्ती हो गई जो राजकुमारी थी वो नहीं जानती थी कि दुख क्या होता है लोग क्यों रोते हैं राजकुमारी अब हर दिन महल के बाहर जाकर अपने सहेली के साथ खेलती थी

उसकी सहेली के माता-पिता बहुत अच्छे थे वो राजकुमारी को बहुत प्यार करते थे और चाहत तो अपने नाम के जैसी सबकी चाहत थी वह सबकी हमेशा सहायता करती थी उसे सभी बहुत प्यार करते थे 1 दिन राजा ने राजकुमारी को गरीबी गरीब लड़की के साथ खेलते हुए देखा तो राजा तुरंत ही उस लड़की के पिता के पास गया और बोला अपनी लड़की 

को समझा देना कि हमारी इच्छा के साथ ना खेले नहीं तो तुम्हारी लड़की को हम दासी बनवा देंगे यह बात सुनकर चाहत के पापा ने चाहत से कहा कि बेटा तुम राजा की लडकी के साथ मत खेला करो राजा साहब ने मना किया है तो चाहत बोली पर मैं तो इच्छा को नहीं बुलाती हूं राजा को अपनी बेटी को डाटना चाहिए चाहत ने कहा ठीक है आज इच्छा आएगी तो मैं उसे मना कर दूंगी 

शाम हुई तो रोज की तरह इच्छा उसे घर गयी तब चाहत ने कहा कि इच्छा तुम हमारे साथ मत खेला करो तुम्हारे पापा जी मना कर रहे थे तभी इच्छा ने कहा कि लेकिन मैं तो पापा जी से पूछ कर आती हूं तुझसे तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा तब चाहत ने समझाया कि देखो तुम एक राजा की बेटी हो और मै एक गरीब कि तुम 

सिर्फ सुख जानती हो दुख क्या है तुम नहीं जानती और तुम्हारे पापा जी नहीं चाहते कि तुम्हारे पास किसी भी प्रकार का दुख आए तब राजकुमारी ने कहा ऐसा क्यों , चाहत बोली कि किसी के जीवन में दुख ही दुख और किसी के जीवन सुख ही सुख है 

और तुम्हारे जीवन में सुख ही सुख है तुम दुःख को अपने पास मत बुलाओ तब राजकुमारी ने कहा लेकिन मुझे वहां महल से ज्यादा तुम्हारे इस छोटे से घर में तुम्हारे साथ रहने से ज्यादा सुख कहीं नहीं मिलता है और राजकुमारी राजा के पास गई और बोली कि पापाजी मैंने क्या गलती की है जो मुझे उस लड़की के साथ रहने से रोकते है


परंतु राजा ने कोई उत्तर नहीं दिया तो राजकुमारी बोली मैं जानती हूं कि दुःख  क्या है सुख क्या है मैं आज से उन गरीबो के घर में रहूंगी तो राजा बोला की इच्छा तुम्हारी हमने हर इच्छा पूरी की है वहां तुम्हें दुख के सिवा कुछ नहीं मिलेगा 

तभी राजकुमारी इच्छा बोली कि आपके यहां से ज्यादा सुख मुझे उस झोपड़ी में मिलता है क्योंकि वहां के लोगो घर छोटे हैं परंतु दिल बहुत बढ़े है कि पूरा गांव समा जाए उनके दिलों में । लेकर आपका महल तो इतना बड़ा है

 लेकिन दिल बिल्कुल चूहे की तरह है और बोली जब तक आप उस लड़की को महल के अंदर नहीं आने देंगे तब तक हम आपके महल में नहीं रहेंगे क्योंकि जितना अधिकार सुःख का  है उतना अधिकार दुःख का भी है

हम यहां से जा रहे हैं आज से आपकी जिंदगी में भी दुःख का पैरा होगा क्योंकि आपके जीवन में अब तक सुख ही सुख रहा है इसलिए इतना दुख भी रहेगा और वह राजकुमारी उस लड़की के साथ रहकर काम करने लगी और रोती थी तभी चाहत ने कहा  इच्छा तुम अपनी दुनिया में वापस चली जाओ तुम्हारी यहां कोई भी इच्छा पूरी नहीं होगी 

तुम्हें दुख ही दुख मिलेगा लेकिन इच्छा कहती कि मेरा तो नाम ही इच्छा है अब मैं अपनी इच्छाओं को त्यागकर आप सबकी इच्छा बनूंगी और तुम मेरी चाहत क्योंकि अब तक मेरे साथ सुख ही सुख था तो मैंने दुख के बारे में जानने की कोशिश नहीं की लेकिन अब मैं जान चुकी हूं कि जितना अधिकार सुख का है उतना अधिकार दुखा का भी है

शिक्षा - यह कहानी सिखाती है कि सच्चाई कभी भी झूठ के छिपाने से नहीं छिपती है वह सच्चाई चाहे किसी भी विषय की हो।



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