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हर लडका गलत नही होता moral story in hindi

              हर लडका गलत नही होता


एक बार की बात है कि एक गांव में सरकारी दफ्तर था वहां पर एक लड़की और 4 लड़के काम करते थे उनमें से एक लड़का था जो हर रोज उस लड़की को देखता रहता था वह लड़की सोचती थी किसी दिन इसकी बेज्जती करवानी पड़ेगी अब यह सुधरेगा वह लड़का उस लड़की से कुछ कहना चाहता था पर वह कह नहीं पाता था

काफी दिन गुजर गए सावन का महीना था उस लड़के ने सोचा कल मैं जरूर बोल दूंगा उसने बाजार से जाकर एक गिफ्ट खरीदा और अगले दिन द्तर पर पहुंचा लड़की ने देखा तो सोचा यह गिफ्ट लेकर क्यों आया है लगता है मुझे देने वाला है इतने में वह लड़का उसके पास गिफ्ट लेकर पहुंचा

वह बोलने वाला ही था कि लड़की बोल पडी क्यों मुझे रोज घूर - घूर के देखते रहते हो क्यों परेशान करते रहते हो यह शोर सुनकर और भी बदतर वाले आ गए और लड़की की बात सुनकर उस लड़के की पिटाई की और बोले अगर दोबारा से तुमने ऐसी हरकत की तो नौकरी से निकाल दिए जाओगे

 उस लड़के ने उसके ग्रुप के अंदर पहले से ही लेटर लिख कर डाल दिया था जिसमें लिखा था कि मैं तुमसे यह कहने वाला था कि 2 दिन बाद रक्षाबंधन है और मेरी कोई बहन नहीं है इसलिए मैं तुम्हें अपनी बहन बनाना चाहता हूं रक्षाबंधन के दिन मेरे घर राखी बांधने आना है आओगी ना यह सारी बातें उस लेटर में लिखी थी
Sad girl
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 वह लड़का उस दफ्तर से इस्तीफा देकर वहां से उसी दिन चला गया और वह गिफ्ट वहीं पर छोड़ दिया उस लड़की ने दूसरे दिन उसी गिफ्ट को देखा परंतु लड़के को नहीं  उसने गिफ्ट खोला तो यह सारी बातें पढ़ कर रोने लगी क्योंकि उस लड़की का भी कोई भाई नहीं था वह राखी किसे बांधती जो भाई मिला था वह भी चला गया हमें किसी की बात बिना सुने कुछ नहीं कहना चाहिए

शिक्षा - बिना विचारे जो करे सो पीछे पछताय कई बार ऐसा हो जाता है कि दिमाग में दूसरे के बारे में कई प्रकार के प्रश्न उठते हैं परंतु जरूरी नहीं है कि जो सोचते हैं वही होगा ये भी जरूरी नहीं कि जो दिखता है वही होता है जो नहीं भी दिखता है वह भी हो सकता है


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 तुम जाओ गांव के पास एक तालाब है वहां से इस घड़े में पानी भरकर ले आओ शिष्य आज्ञाकारी था वह तालाब के पास पहुंचा तो उसने देखा कि उस तालाब पर तो किसान अपने बैलों को स्नान करा रहे हैं 


और लोग तालाब पर कूद कूद स्नान कर रहे है इसके कारण तालाब का पानी तो गंदा था वह सोचने लगा कि इतना गंदा पानी गुरु जी को लेकर जाऊं तो कैसे जाऊं थोड़ी देर इंतजार किया फिर वह अपने गुरूजी के पास वापस पहुंच गया 


जहां गौतम बुध्द एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे और गौतम बुद्ध से कहा माफी चाहता हूं गुरुदेव मैं चाहता था पानी भरकर लाना लेकिन पानी इतना गंदा था कि मैं पानी भर कर नहीं ला पाया गौतम बुद्ध ने उससे कहा चलो अच्छा तुम भी यही आराम कर लो आधे घंटे बाद गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा 

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तुम जाओ इस घड़े में तालाब से पानी भरकर ले आओ बहुत तेज प्यास लगी है शिष्य फिर से तालाब पर पहुंचा तो उसने …

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