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अच्छी सीख - inspirational story in hindi

                         अच्छी सीख

एक बार एक शहर में एक मां अपने बेटे के साथ रहती थी उसके पति की मृत्यु हो चुकी थी मां अपने बेटे को बहुत अच्छे स्कूल में पढ़ाती थी
अच्छी सीख - inspirational story in hindi


ताकि बेटे पर जल्दी सरकारी नौकरी मिल जाए काफी समय बीत गया दोनों बहुत खुशी से जीवन बिता रहे थे जब बेटे की पढ़ाई पूरी हुई तो नौकरी की तलाश के लिए 1 साल के लिए दूसरे शहर में चला गया 

अब मां अकेली रह गई मां हमेशा अपने बेटे को अच्छी बातें सिखाता थी वैसे ही अच्छे विचारों का बेटा बना 1साल बाद मां को एक खुशखबरी उसके बेटे ने सुनाई की मां मुझे सरकारी नौकरी मिल गई है

 अब मां बहुत खुश हुई मां ने पूरे मोहल्ले में खुशी के लड्डू बटवाये कुछ दिनों बाद बेटा मां को अपने साथ ले गया जहां वह नौकरी करता था वह एक क्लर्क बाबू बना गया था 3 साल बाद उसकी शादी हो गयीं 


अब उस घर में 3 सदस्य हो गए मां अपनी बहू को बहुत प्यार करती थी परंतु बहू मां को प्यार नहीं करती थी 5 साल बाद उस घर में एकऔर खुशहाली आयी कि।

वह अब दादी बन गई थी उस घर में एक बेटा पैदा हुआ था अब तो मां बहुत खुश थी फिर भी कभी-कभी बहू की कड़वी बातें सुनकर उसका दिल दुःख जाता था परंतु वह अपने बेटे से कभी बहू की शिकायत नहीं करती थी 

बहू कभी भी मां से प्यार से नहीं बोलती थी लेकिन मां अपने पोते को देखकर सारी बातें भुला देती थी मां ने पोते का नाम दीपक रख दिया वह हमेशा दीपक - दीपक पुकाती रहती थी जब दीपक 4 साल का हो गया तो उसके पिता ने अच्छे स्कूल मे दाखिला करवा दिया

अब दीपक का आधा समय स्कूल में बीतने लगा और आधा समय दादी के साथ कुछ दिनों में दीपक की मां ने दीपक को ट्यूशन लगवा दिया ताकि वह दादी के साथ ज्यादा समय ना बिताये 

अब दादी का समय बहुत मुश्किल से गुजरता था दीपक सुबह स्कूल जाता स्कूल से वापस आने के बाद ट्यूशन  के लिए जाता जब ट्यूशन से वापस आता तब दादी के पास गले से लिपट जाता और दादी की गोदी में उछलता कूदता यह सब देखकर दीपक की मां दीपक को बुला लेती कि दीपक जाओ स्कूल का और ट्यूशन का होम वर्क करो तो दीपक फिर से पढ़ाई में लग जाता
अच्छी सीख - inspirational story in hindi


समय बीतता गया अब दादी बूढ़ी हो गई आंखों में चश्मा हाथ में डंडे लेकर चलने लगी दादी को आंखों से कम दिखने लगा दादी का कभी चश्मा गुम हो जाता तो कभी डंडी खो जाती दादी अपनी बहू से कहती की बहू मेरा चश्मा नहीं मिल रहा है कहीं देखा है क्या 

तो बहु बोलती की मां अब तुम तो बिल्कुल अंधी हो गई हो चश्मा तुम्हारे पास मे रखा है तब भी मांगती रहती हो कि चश्मा खो गया है कहीं डंडी खो गई है अपना सामान खुद संभाल कर रखा करो

यह सारी बातें दीपक हर रोज सुनता था और सोंचता की दादी तो हमेशा मम्मी से प्यार से कहती है परंतु मम्मी हमेशा दादी को डरती रहती है पापा भी कभी मम्मी को नहीं डाटतेंं कि मेरी मां को ऐसा क्यों कहती हो पापा हमेशा मम्मी की तरफ बोलते हैं दादी को सच्ची बातें सुननी पड़ती है

एक दिन दीपक की मम्मी रोज की तरह दीपक को स्कूल जाने के लिए तैयार कर रही थी दीपक को तैयार करने के बाद उसकी किताबें बैग में रख रही थी इतने में दादी बोली की बहू मेरा चश्मा नहीं मिल रहा है मुझे पेपर पढ़ना है 

तो बहू बोली क्या करूं मैं आपका तो हर रोज चश्मा हो जाता है मुझे टाइम नहीं है खुद ढूंढो मुझे अभी दीपक का टिफिन पैक करना है और दीपक के पापा का भी टिफिन पैक करना है

 यह सब देखकर दीपक कुछ नहीं बोला थो़डी देर में दीपक की दादी ने अपने बेटे से कहा कि बेटा मेरा चश्मा नहीं मिल रहा है तो बेटे ने कहा कि मां आप सचमुच में अंधी हो गई हो यहीं तो रखा है चश्मा और चश्मा उठाकर अपनी मां को दे दिया


यह बातें सुनकर दादी के आंखों में आंसू आ गए फिर वहीं पर पेपर पढ़ने लगी 1 घंटे बाद दीपक का स्कूल जाने का समय आया इतने में दीपक के पापा ने कहा कि दीपक तुमने सही मेरी घड़ी देखी है क्या मिल नहीं रही है

तो दीपक ने कहा कि पापा लगता है कि आप सचमुच में अंधे हो गए हैं यहीं तो रखी है आपके आंखों के सामने यह लो यह सुनकर दीपक के पापा ने डांटते हुए कहा कि दीपक तुम किस तरह से बात कर रहे हो


ऐसे बड़ों से बातें की जाती हैं यही स्कूल में सीखते हो डांट सुनकर दीपक कुछ नहीं बोला क्योंकि उसने कभी भी इस तरह से बड़ों से बात नहीं की थी

दीपक ने अपना बैग उठाया और स्कूल के लिए जाने लगा जब दरवाजे के बाहर पहुंचा तब दीपक बड़े प्यार से बोला कि पापा यह सब मैं स्कूल से नहीं आप से सीखा हूं इतना कहकर दीपक वहां से चला गया

 यह सब सुनकर दीपक के माता-पिता को समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक दीपक पर इतना बदलाव कैसे हो गया और  दोनों मां की तरफ देखने लगे तब मांं वहां से उठकर दूसरे कमरे में चली गई 

स्कूल से आने के बाद दीपक अपनी दादी के पास पहुंचा तो दादी ने सझाया कि बेटा अपने मम्मी पापा से ऐसे बात नहीं की जाती है वह तुम्हारे लिए भगवान हैं तो दीपक ने कहा कि दादी आप भी तो पापा की मां हो 

फिर मम्मी पापा आपसे क्यों ऐसे बात करते हैं तो दादी ने कहा कि बेटा हमेशा अच्छी बातों को ग्रहण की जाती हैं और बुरी बातों को अपने से अलग की जाती हैं यह बातें दीपक के माता-पिता छिपकर सुन रहे थे फिर कभी दीपक की मां ने दादी से गुस्से से बात नहीं की और कभी कुछ गलत नहीं कहा

शिक्षा-  बच्चों के प्रथम गुरु उनके माता-पिता होते हैं बच्चेंं अच्छा बुरा जो भी सीखते हैं पहले अपने घर से सीखते हैं बाद में स्कूल में सीखते हैं बच्चों के सामने हमेशा अच्छे काम वा अच्छी बातें करनी चाहिए क्योंकि बच्चों को अच्छे काम सिखाने पड़ते हैं लेकिन बुरे काम बिना सिखाएं सीख जाते हैं बच्चों के अंदर सीखने की बहुत तीव्र इच्छा होती है वह बहुत जल्दी सीखते है

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