माँ और पिता की शिक्षा moral story

                Moral story


आज हम आपको लेकर आये है  hindustory.com मे एक नयी कहानी जो आपके लिए लाबदायक हो सकती है 
दो दोस्त थे उनकी उम्र 5 वर्ष की थी एक का नाम राम और दूसरे का नाम श्याम था राम के पिता का नाम रामलखन था और श्याम के पिता का नाम करण सिंह था राम के पिता किसान थे और उनकी माता 10th क्लास तक पढ़ी हुई थी
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श्याम के पिता के पास ज्यादा खेती होने से राम के पिता से अमीर थे लेकिन श्याम के पिता अनपढ और उसकी माता भी कभी स्कूल नहीं गई थी श्याम के पिता की जमीन ज्यादा थी तो वह उसी से अपना घर चलाते थे राम के पिता के पास जमीन नहीं थी तो वह श्याम के पिता की खेती में काम किया करते और अपना घर चलाया करते

राम और श्याम दोनों ही स्कूल जाया करते हैं और दोनों के स्कूल अलग-अलग थे राम सरकारी स्कूल में जाता और श्याम प्राइवेट स्कूल में जाता जहां पर अच्छा बैठने और पढ़ने को मिलता लेकिन श्याम के नंबर हमेशा राम के नंबर से कम आते
माँ और पिता की शिक्षा  Motivational story
Mother and son

तो एक दिन श्याम के पिता ने राम के पिता से पूछा क्यों रामलखन मैं अपने बेटे को अच्छे स्कूल में भेजता हूं फिर भी मेरे बेटे के नंबर तुम्हारे बेटे से कम आते हैं तभी रामलखन ने बताया कि मेरे बेटे के नंबर ज्यादा इसलिए आते है कि वह स्कूल से आकर वह अपनी माँ से शाम को प्रतिदिन पढ़ता है और स्कूल का सारा होमवर्क करता है यह सुनकर करनसिंह ने अपने बेटे को एक कोचिंग भी लगा दी लेकिन अगले साल फिर से राम के नंबर शाम के नंबर से ज्यादा आए


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फिर से करण सिंह ने राम लखन से कहा अब तो मैंने उसे स्कूल आने के बाद उसे कोचिंग भी भेजता रहा हूं फिर भी इस बार मेरे बेटे के कम नंबर आए हुए हैं तभी रामलखन ने उत्तर देते हुए कहा कि करण सिंह तुम नहीं जानते कि सबसे अच्छा गुरु उसकी माता ही होती है क्योंकि जब बच्चा कुछ भी नहीं जानता तब उसे वह बोलना सिखाती है इसलिए अपने बच्चों को घर पर ही जरूर पढ़ाएं जिससे उसकी जड़ें {नींह} मजबूत हो जाए और आगे बढ़ते चले जाए

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                     आलसी इंसान

यह कहानी मेरे दोस्त कुमार की है जो कि बहुत ही आलसी था इतना आलसी था कि अगर उसको प्यास लगी हो तो वह पानी खुद जाकर पानी नहीं पी सकता था और वह दूसरों से पानी मांगता था अगर वह अपने बेड पर लेटा होता तो उसके बगल  मे रखी बोतल से पानी नही पी सकता था जब वह ज्यादा ही प्यासा हो जाता तभी बेड से उठ कर बोतल से पानी पीता ।

Puppy
Puppy
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एक दिन की बात है वह बाजार गया था उसने देखा कि एक पान की दुकान के कुछ दूर में एक कुत्ते का पिल्ला लेटा हुआ था पान की दुकान रोड के किनारे थी और कुत्ते के पिल्ले के नीचे कुछ कबाड़ डला हुआ था सर्दी का मौसम था और वह कबाड़ रोड के बिल्कुल किनारे ही था और उस पर कुत्ते का पिल्ला लेटा हुआ था कबाड़ की वजह से वह पिल्ला लोगों को साफ नहीं दिख रहा था तभी अचानक से एक गाड़ी आईऔर वह पिल्ले से थोड़ी दूर गाड़ी रुक गई और सभी यात्री गाड़ी से उतरने लगे यह सब कुमार देख रहा था

 जो कि  बड़ा ही आलसी था उसको लग रहा था कि अगर गाड़ी थोड़ी ही आगे बढ़ गई तो वह कुत्ते का पिल्ला मारा जाएगा कुमार को लग रहा था क्यों ना मैं उसे एक तरफ कर दूं जिससे उसकी जिंदगी बच जाए कुत्ते का पिल्ला तो आराम से सो रहा था लेकिन गाड़ी अभी बंद नहीं हुई थी कुमार किसी को आवाज लगा था तब तक की गाड़ी आगे बढ़


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गयी और कुत्ते के पिल्ले के ऊपर पहिया चल गया तभी कुछ लोगों ने ड्राइवर को बताया कि पिल्ला नीचे दब गया है और ड्राइवर ने पहिया पीछे किया और कुत्ते के पिल्ले के ऊपर दोबारा से पहिया चल गया और उस कुत्ते के पिल्ले की मौत हो गई तबकुमार को बड़ा ही पश्चाताप हुआ कि अगर मैं उसे उठाकर एक तरफ कर देता तो आज वह जिंदा होता तब कुमार को लगा कि लोग मुझे ठीक ही कहा करते थे कि तू बहुत ही आलसी इंसान है और इस आलस की वजह से तुझे एक दिन बड़ा ही पश्चाताप होगा तब से कुमार ने आलस पन छोड़ दिया

 इस कहानी से हमें यह पता चलता है कि आलसी होना हमारे लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है

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