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भरोसा और विश्वास moral story in hindi

               भरोसा और विश्वास

Brothers
Brothers

एक बार की बात है एक गांव में एक गरीब लड़का रहता था उसके माता पिता बचपन में ही खत्म हो गए थे उसका एक भाई था वो अपने भाई को पढ़ा लिखा कर उसे डॉक्टर बनाना चाहता था छोटा भाई 5 साल का हो जाता है और वह स्कूल जाने लगता है बड़ा भाई सारा दिन धूप में काम करता रहता था
Child
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वह काम करके घर का खर्चा और अपने भाई के पढ़ाई का खर्चा अपनी कमाई के पैसों से चलाता था उसका छोटा भाई अब पूरी पढ़ाई पढ़ चुका था पर अपने भाई के सपने के बारे में कभी नहीं सोचता था कि उसके भाई का सपना क्या है वह इतना काम क्यों करता है और किसके लिए करता है एक दिन उसनें अपने भाई की परीक्षा लेनी चाही

उसके भाई को भाई प्यारा है या पैसा , छोटे भाई ने झूठ बोलकर ₹500 किताब खरीदने के लिए मांगे और जाकर कपड़े खरीद कर ले आया बड़े भाई ने पूछा की किताब कहां है तो छोटा भाई बोला कि किताब नहीं मिली तो मैंने कपड़े खरीद ले आया उसका बड़ा भाई बहुत गुससा हुआ कि तुमने इतने सारे रुपए बर्बाद कर दिए उसने उसको बहुत डांटा तो छोटे भाई को लगा कि उसके भाई को पैसा ज्यादा प्यारा है और भाई बिल्कुल भी नहीं । और छोटा भाई नाराज होकर गांव छोड़कर चला गया ।

कुछ दिन शहर में काम करना पड़ा तब उसे एहसास हुआ कि पैसा कितनी मेहनत से आता है कुछ दिन बाद वह वापस अपने भाई के पास गांव में पहुंचा तो देखा कि उसका भाई अब काम पर नहीं जाता है  आराम से घर में रहता है  पर छोटा भाई दो दिन तक देखता रहा कि उसका भाई ना काम करने जाता है और ना ही ठीक से भोजन करता है

शांत गुमसुम सा रहता है छोटे भाई ने पूछा कि भैया  काम पर क्यों नहीं जाते हो तो बड़ा भाई बोला कि मुझे पैसों को अब क्या करना है मेरे तो सपनों की चिता ही जल गई और जिसके लिए पैसे कमाए उसे पैसे अच्छे नहीं लगते हैं और मेरा तो सब से भरोसा ही उठ गया है कि मेरा भी कोई है यह सारी बातें सुकर छोटे भाई को पता चला कि अपनों के अंदर के सपने हमसे जुड़े होते है




 शिक्षा - हमें कभी भी अपनों को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए और किसी के भरोसे तथा विश्वास को नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि यदि एक बार भरोसा विश्वास टूट जाए तो उसको दोबारा से जीतना आसान नहीं , जितना हम सबको लगता है



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और लोग तालाब पर कूद कूद स्नान कर रहे है इसके कारण तालाब का पानी तो गंदा था वह सोचने लगा कि इतना गंदा पानी गुरु जी को लेकर जाऊं तो कैसे जाऊं थोड़ी देर इंतजार किया फिर वह अपने गुरूजी के पास वापस पहुंच गया 


जहां गौतम बुध्द एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे और गौतम बुद्ध से कहा माफी चाहता हूं गुरुदेव मैं चाहता था पानी भरकर लाना लेकिन पानी इतना गंदा था कि मैं पानी भर कर नहीं ला पाया गौतम बुद्ध ने उससे कहा चलो अच्छा तुम भी यही आराम कर लो आधे घंटे बाद गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा 

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