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खरगोश और कछुआ moral story in hindi

                  खरगोश और कछुआ

आज हम लेकर आए है हिन्दूस्टोरी .com मे खरगोश और कछुआ की रेस की पूरी कहानी ।

हम में से ज्यादा तर लोगो ने खरगोश और कछुआ की रेस की कहानी तो जरूर सुनी है लेकिन इनकी रेस सिर्फ एक बार नहीं बल्कि 4 बार हुई थी
खरगोश और कछुआ moral story in hindi
खरगोश और कछुआ


एक बार की बात है एक खरगोश और कछुए में बहस हो गई कौन सबसे तेज दौड़ता है बहुत देर तक झगड़ा होने के बाद उन्होंने तय किया कि इस बात का फैसला तो एक रेस से ही किया जाए जो रेस जीतेगा वही सबसे तेज माना जाएगा अब दोनों इस बात से राजी हो गए दौड़ने के लिए एक जगह का चुनाव भी किया गया

अगले सुबह रेस शुरू हुई । रेस शुरू होते ही खरगोश बहुत तेजी से भागा और कछुआ से बहुत आगे निकल गया कुछ देर लगातार भागते रहने के बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा तो , खरगोश ने सोचा कि कछुआ तो बहुत धीरे से चला आ रहा है क्यों ना मैं आराम कर लेता हूं ।

तो वह वही पर एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा और जल्दी ही उसकी आंख लग गई और वह गहरी नींद में सो गया कछुआ बिना रुके बिना थके लगातार चलता रहा है एक वक्त आया पेड़ के नीचे सोए  हुए खरगोश से आगे निकल गया और खरगोश जब नींद से उठा तो उसे बहुत दुख हुआ ये जानकर कि इतना तेज भागने के बाद भी वह कछुआ से हार गया।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह पता चलता है कि जो बिना रुके बिना थके  अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहता है तो  उसी की जीत होती है

पर यह कहानी यहीं पर खत्म नहीं होती है खरगोश अपनी हार को लेकर के बहुत निराश हुआ उसे पता चल गया कि खुद पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने के कारण ही वह रेस हार गया है

अब खरगोश को गुस्सा आया और उसने एक बार फिर से कछुआ को चुनौती दी अपनी जीत की खुशी से उत्साहित कछुआ ने इस बार भी चुनौती स्वीकार कर ली मगर इस बार खरगोश पूरी तैयारी के साथ था वह शुरू से आखिर तक बिना रुके दौड़ता रहा कछुआ को मीलों दूर पीछे छोड़कर खरगोश यह रेस जीत गया

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अपनी मंजिल की ओर लगातार तेजी से बढ़ने से धीरे चलने वाले को पछाड़ता है

लेकिन कहानी यहां पर खत्म नहीं होती खरगोश से हारने के बाद कछुआ ने बहुत सोचा उसने जाना की रेस का यह जो तरीका है उसमें तो खरगोश को कभी बीमार नहीं दे पाएगा तो उसने इस बारे में गहराई से सोचा और फिर 1 रेस के लिए खरगोश को चुनौती दे डाली

मगर इस बार रेस का रास्ता कुछ अलग चुना गया खरगोश ने शर्त मान ली और रेस एक बार फिर से शुरू हुई और इस बार भी खरगोश तेजी से भागता हुआ एक बड़ी सी नदी के किनारे पहुंच गया उसकी मंजिल और उसके बीच कुछ किलोमीटर का ही फैसला था

नदी के किनारे बैठा हुआ खरगोश सोचता रहा कि अब आगे क्या करूं तभी धीमी रफ्तार से कछुआ भी वहां पर पहुंच गया वह नदी में उतरा और वह तैरता हुआ नदी के दूसरी ओर निकल गया और आगे चलता रहा और इस तरह से कछुआ यह रेस जीत गए

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सबसे पहले आप अपनी काबिलियत को पहचानिए और उसके हिसाब से अपने खेल को चुनिए जहां पर अपनी काबिलियत का सबसे बेहतर इस्तेमाल हो सके।

लेकिन यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई अब तक खरगोश और कछुआ अच्छे दोस्त बन चुके थे दोनों ने अपनी अपनी कमियां और खूबियों पर बहुत गहरायी से सोचा उन्हें यह एहसास हुआ कि आखिरी रेस में दोनों बेहतर कर सकते है

तो उन्होंने एक बार फिर से आखरी बार रेस का फैसला कर लिया लेकिन इस बार दोनों एक टीम की तरह काम करना चाहते थे दोनों ने साथ में रेस शुरू कि इस बार खरगोश ने कछुआ को अपनी पीठ पर बैठा कर नदी तक ले गया अब यहां से आगे कछुआ की बारी थी कछुआ ने खरगोश को अपनी पीठ पर बैठा कर नदी पार कराया नदी पार कराते ही खरगोश ने कछुआ को अपनी पीठ पर बैठा कर दोनों ने ही एक साथ रेस को खत्म किया अब जो संतुष्टि हुई थी वह इससे पहले कभी नहीं हुई मिली थी

शिक्षा - इस पूरी कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि खुद में बेहतरीन खिलाड़ी होना अच्छी बात है लेकिन अपनी काबिलियत के बावजूद अगर आप बाकीयों की काबिलियत के साथ अपने तालमेल बैठाकर के टीम के रूप में काम नहीं कर सकते तो आप चाहे कितनी भी कोशिश कर ले हमेशा उम्मीद से कम ही हासिल कर पाएंगे क्योंकि जिंदगी में ऐसे कई सारे मौके आएंगे जहां पर लोग आपसे बेहतर साबित होगें।



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