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चुपचाप- Short film story in hindi

                           "चुपचाप"
"  चुपचाप सब हो जाता है होकर के करके गुजर जाता है ,वो शैतानी काला साया पीछे से आ जाता है ,गुर्दा के ऐसे फटता है जैसे बाज चिड़िया ले जाता है, बदन पर फर्क क्या ही पड़ेगा वो रूह में आग लगाता है ,चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है ,रास्ते पर इज्जत लुटती है रास्ता भी र्थथराता है आंख से आंसू नहीं गिरता कुछ लहू सा  टपक जाता है, चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है, मिलता उसको इंसाफ यहां जो इसके लिए लड़ जाता है, उसके जख्म नासूर बने जो अपने जख्म छुपाता है, चुपचाप सब हो जाता है वह करके गुजर जाता है  "
यह कहानी रुनझुन की मां की कहानी है मां का नाम गीता था रुनझुन के पिता का नाम रजत था यह कहानी शुरू होती है रुनझुन के घर से रुनझुन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी तभी रजत ने टीवी ऑन कर दी इसमें   एक बलात्कार की खबर आ रही थी तभी रजत ने गीता से कहा सुनो रुनझुन का शाम 7:00 बजे का ट्यूशन बंद करा दो कहीं हमारी रुनझुन के साथ कुछ गलत ना हो जाए तो तुम साथ उसे कोचिंग छोड़ने और लेने जाना और रजत ऑफिस चला गया था है 

गीता भी रुनझुन को स्कूल ले जाती…

सतरंगी बहन moral story in hindi

                           सतरंगी बहन


एक बार की बात है कि एक गांव में एक बहुत ही गरीब परिवार रहता था उस परिवार में 8 सदस्य थे माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका था उस परिवार में एक लड़की और 7 लड़के थे लड़की सबसे बड़ी थी वह अपने सातों भाइयों को बहुत प्यार करती थी बहन तो पढ़ी-लिखी नहीं थी पर फिर भी वह अपने भाइयों को पढ़ाना चाहती थी
Sister and brother
Sister and brother


 वह दूसरों के घरों में नौकर बन कर काम करती थी रात में कपड़ों की सिलाई करती थी इस प्रकार परिवार का भरण पोषण करती फिर भी सातों भाई एक दूसरे से हमेशा लड़ते रहते थे कभी पैसे के पीछे तो कभी कपड़ों के पीछे कभी भोजन के पीछे लेकिन बहन नहीं चाहती थी

कि उसके भाई उससे कभी नाराज ना हो इसलिए अपनी इच्छाओं को त्यागकर अपने भाइयों की हर जरूरत और हर इच्छा को पूरा करती थी एक दिन उसकी सहेली रेखा देख रही थी कि उसके सातों भाइयों के बीच में भोजन के बारे में झगड़ा हो रहा था बहन हर तरीके से भाइयों को समझाने की कोशिश कर रही थी

 पर फिर भी भाई नहीं मान रहे थे एक भाई कहता है कि तुम बड़े को  ज्यादा चाहती हो तो दूसरा भाई बोलता है कि तुम छोटे को जाए ज्यादा चाहती हो इतने में तीसरा भाई बोला कि मुझे छोड़कर तुम सबको चाहती हो काफी देर हो चुकी थी फिर भी यह झगड़ा शांत नहीं हुआ


यह सब रेखा देख रही थी तो रेखा को बहुत गुस्सा आ रहा था कि बहन इतना प्यार सबको देती है पर फिर भी भाई ,बहन को प्यार नहीं करते है कभी उसके बारे में नहीं सोचते सिर्फ अपने ही बारे में सोचते रहते हैं रेखा घर लौट आयी और जमीन पर बैठ गई अचानक रेखा ने देखा कि एक गुडं का टुकड़ा जमीन पर पड़ा था और एक चीटी सूंघते हुए


गुड़ के पास आयी फिर वापस लौट गई थोड़ी देर बाद देखा तो उस छोटे से टुकड़े मे ढेर सारी चींटियां आकर उसे खाने लगी गुड का टुकड़ा इतना छोटा था कि चीटियों के बीच में दिख भी नहीं रहा था क्योंकि चीटियां बहुत ज्यादा थी फिर भी उनमें कोई झगड़ा नहीं हो रहा था बड़े प्यार स्नेह के साथ एक झुंड  में खा रही थी यह देखकर रेखा को बहुत आश्चर्य हुआ और उसे लगा कि वह सातों भाइयों को बुलाकर लाए और शायद उन्हें कुछ समझ सके

रेखा उनके घर गई बहन तथा सातों भाइयों को लेकर आई और सारी कहानी सुनाई सातो भाई चीटियों को बड़े ही प्यार से देख रहे थे जो चींटी सभी को बुला कर लाई थी वह सब से दूर खड़ी हुई थी वह गुड के पास में नहीं थी फिर एक चींटी उस चीटी  को बुलाकर गुड के पास ले गयी  और फिर से सभी चीटियां गुड खाने लगी तब रेखा सातों भाइयों को समझाया

कि देखो इन चीटियों को जो चींटी   सबको  लेकर आई थी कि गुड़ यहां पर रखा है पर फिर भी वो नहीं खा रही है सारी चीटीयाँ ने उसे भी ले जाकर उसे भी खिलाया क्या तुम लोगों ने कभी अपने बहन को कभी अपने साथ खिलाया है वह तुम्हारी हर जरूरत को पूरी करती है तुम लोगों के कारण इतनी मेहनत करती है पर फिर भी तुम लोग उसके बारे में कभी नहीं सोचते कि हमारी बहन ने खाया है  या नहीं ना ही उसके पास अच्छे कपड़े है कि नहीं है वह सिर्फ तुम लोगों को खुश और एक साथ रहना देखना चाहती है पर फिर भी तुम लोग झगड़ते रहते हो अब सतों भाइयों को बहुत अच्छे से समझ में आ गया और अपने बहन के पैरों में गिर पड़े और


कहने लगे कि अब हम कभी नहीं लड़ेंगे चीटियों की तरह हिल मिलकर रहेंगे फिर बहन ने अपने भाइयों को गले लगाया और
रेखा को धन्यवाद दिया कि तुमने हमारे भाइयों को एक साथ रखना सिखाया काफी समय बीतने के बाद दो भाइयों की नौकरी लग गई भाइयों ने सोचा कि अब अपनी बहन की शादी खूब धूमधाम से करवाएंगे पर मैंने कहा कि हम शादी नहीं करेंगे हमें तो सातों भाइयों केबीच में रहना है हम तुम को छोड़ कर कभी नहीं जाएंगे पर बहन ने अपने तीन भाइयों का विवाह करवा दिया शादी के बाद भाइयों की बीवियों ने कहा कि इस घर में हम रहेंगे या तुम्हारी बहन रहेगी तीनो भाई अपनी पत्नियों को छोड़ना नहीं चाहते थे फिर भी उन्होंने कहा कि दीदी हमें आपके साथ नहीं रहना है बहुत दिन हो चुके साथ रहते-रहते अब हमें छोड़ दो यह सारी बातें सुनकर बहन को  बहुत दुख हुआ और जा कर आत्महत्या कर ली



और चिट्ठी में लिख कर रख गई कि मैं सबको इतनी छोड़ना नहीं चाहती थी पर मैंने हर इच्छा तुम्हारी पूरी की है तो यह इच्छा भी पूरी कर दी अब अपने चारों भाइयों की देखभाल करने की जिम्मेदारी तीनों की है अपनी बीवियों के कहने से तुम तीनों ने मुझे अलग किया है पर मेरी तुम तीनों से यह इच्छा है कि कभी


अपनी बीवियों के कहने से अपने भाइयों को कभी अलग मत करना यह सारी बातें जानकर तीनों भाइयों को बहुत दुख हुआ और तीनो भाई उससे अपनी बीवी को छोड़कर अपने भाइयों को लेकर गांव छोड़कर वहां से चले गए कहीं यह तीनों हमें हमारे भाइयों को अलग ना कर दे हमने अपनी बहन को खो दिया है लेकिन अपने भाइयों को खोना नहीं चाहते हैं

शिक्षा -इस कहानी से हमे ये सीख मिलती है कि हमें कभी लड़ना झगड़ना नहीं चाहिए दुख सुख में एक दूसरे का साथ होना  चाहिए  और एक रिस्ता  जोड़ने से पुराने रिश्तो को नहीं छोड़ना चाहिए और अपने से बड़ों को प्यार देना चाहिए जिससे तुम्हारी जिंदगी शुरु हुई है उसकी जिंदगी खत्म नहीं करनी चाहिए


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