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May, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भरोसा और विश्वास moral story in hindi

भरोसा और विश्वास
एक बार की बात है एक गांव में एक गरीब लड़का रहता था उसके माता पिता बचपन में ही खत्म हो गए थे उसका एक भाई था वो अपने भाई को पढ़ा लिखा कर उसे डॉक्टर बनाना चाहता था छोटा भाई 5 साल का हो जाता है और वह स्कूल जाने लगता है बड़ा भाई सारा दिन धूप में काम करता रहता था


वह काम करके घर का खर्चा और अपने भाई के पढ़ाई का खर्चा अपनी कमाई के पैसों से चलाता था उसका छोटा भाई अब पूरी पढ़ाई पढ़ चुका था पर अपने भाई के सपने के बारे में कभी नहीं सोचता था कि उसके भाई का सपना क्या है वह इतना काम क्यों करता है और किसके लिए करता है एक दिन उसनें अपने भाई की परीक्षा लेनी चाही

उसके भाई को भाई प्यारा है या पैसा , छोटे भाई ने झूठ बोलकर ₹500 किताब खरीदने के लिए मांगे और जाकर कपड़े खरीद कर ले आया बड़े भाई ने पूछा की किताब कहां है तो छोटा भाई बोला कि किताब नहीं मिली तो मैंने कपड़े खरीद ले आया उसका बड़ा भाई बहुत गुससा हुआ कि तुमने इतने सारे रुपए बर्बाद कर दिए उसने उसको बहुत डांटा तो छोटे भाई को लगा कि उसके भाई को पैसा ज्यादा प्यारा है और भाई बिल्कुल भी नहीं । और छोटा भाई नाराज होकर गांव छोड़कर…

खरगोश और कछुआ moral story in hindi

खरगोश और कछुआआज हम लेकर आए है हिन्दूस्टोरी .com मे खरगोश और कछुआ की रेस की पूरी कहानी ।

हम में से ज्यादा तर लोगो ने खरगोश और कछुआ की रेस की कहानी तो जरूर सुनी है लेकिन इनकी रेस सिर्फ एक बार नहीं बल्कि 4 बार हुई थी


एक बार की बात है एक खरगोश और कछुए में बहस हो गई कौन सबसे तेज दौड़ता है बहुत देर तक झगड़ा होने के बाद उन्होंने तय किया कि इस बात का फैसला तो एक रेस से ही किया जाए जो रेस जीतेगा वही सबसे तेज माना जाएगा अब दोनों इस बात से राजी हो गए दौड़ने के लिए एक जगह का चुनाव भी किया गया

अगले सुबह रेस शुरू हुई । रेस शुरू होते ही खरगोश बहुत तेजी से भागा और कछुआ से बहुत आगे निकल गया कुछ देर लगातार भागते रहने के बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा तो , खरगोश ने सोचा कि कछुआ तो बहुत धीरे से चला आ रहा है क्यों ना मैं आराम कर लेता हूं ।

तो वह वही पर एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा और जल्दी ही उसकी आंख लग गई और वह गहरी नींद में सो गया कछुआ बिना रुके बिना थके लगातार चलता रहा है एक वक्त आया पेड़ के नीचे सोए  हुए खरगोश से आगे निकल गया और खरगोश जब नींद से उठा तो उसे बहुत दुख हुआ ये जानकर कि इतना …

समय का खेल moral story in hindi

समय का खेल          समय हमारा शत्रु भी है और मित्र भी
एक बार की बात है कि एक परिवार खुशहाल जीवन व्यतीत करता था लेकिन कहते हैं कि शुख-दुख कुछ पल के लिए होते हैं क्योंकि जीवन सुख दुख का संगम है जो सुख ही सुख में रहता है वह दुख का अनुभव नहीं कर सकता है इसलिए सुख दुख दोनों ही जरूरी है उस परिवार में 5 सदस्य थे मां-बाप और तीन बेटे यह तीनों बेटे बड़े ही प्रेम और स्नेह के साथ रहते थे बाप कुछ काम धंधा नहीं करता था

और माँँ ही बेटो की देखभाल का पूरा ध्यान रखती थी समय बीतता गया और बाप ने पूरी जमीन धन दौलत जुमे के खेल में बेच डाली अब मां के पास अपने गांव जाने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था वह तीनों बेटों को ले जाकर अपने मायके आ गई और अब तीनों बेटे काफी बड़े और समझदार भी हो गए थे उन तीनों बेटों में सबसे बड़ा बेटा बहुत ही मन तन से और मेहनत से पढ़ाई कर रहा था

 लेकिन पढ़ना तो तीनों को था पर पैसे की जरूरत ज्यादा बढ़ गई तो बड़े भाई ने 5,6,7और 8 वाले बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपने भाइयों को पढ़ाया और अपने पढ़ाई का भी खर्चा उठाया लेकिन जो सबसे छोटा भाई था उसका मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था…

सतरंगी बहन moral story in hindi

सतरंगी बहन
एक बार की बात है कि एक गांव में एक बहुत ही गरीब परिवार रहता था उस परिवार में 8 सदस्य थे माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका था उस परिवार में एक लड़की और 7 लड़के थे लड़की सबसे बड़ी थी वह अपने सातों भाइयों को बहुत प्यार करती थी बहन तो पढ़ी-लिखी नहीं थी पर फिर भी वह अपने भाइयों को पढ़ाना चाहती थी


 वह दूसरों के घरों में नौकर बन कर काम करती थी रात में कपड़ों की सिलाई करती थी इस प्रकार परिवार का भरण पोषण करती फिर भी सातों भाई एक दूसरे से हमेशा लड़ते रहते थे कभी पैसे के पीछे तो कभी कपड़ों के पीछे कभी भोजन के पीछे लेकिन बहन नहीं चाहती थी

कि उसके भाई उससे कभी नाराज ना हो इसलिए अपनी इच्छाओं को त्यागकर अपने भाइयों की हर जरूरत और हर इच्छा को पूरा करती थी एक दिन उसकी सहेली रेखा देख रही थी कि उसके सातों भाइयों के बीच में भोजन के बारे में झगड़ा हो रहा था बहन हर तरीके से भाइयों को समझाने की कोशिश कर रही थी

 पर फिर भी भाई नहीं मान रहे थे एक भाई कहता है कि तुम बड़े को  ज्यादा चाहती हो तो दूसरा भाई बोलता है कि तुम छोटे को जाए ज्यादा चाहती हो इतने में तीसरा भाई बोला कि मुझे छ…

माँ और पिता की शिक्षा moral story

Moral story
आज हम आपको लेकर आये है  hindustory.com मे एक नयी कहानी जो आपके लिए लाबदायक हो सकती है  दो दोस्त थे उनकी उम्र 5 वर्ष की थी एक का नाम राम और दूसरे का नाम श्याम था राम के पिता का नाम रामलखन था और श्याम के पिता का नाम करण सिंह था राम के पिता किसान थे और उनकी माता 10th क्लास तक पढ़ी हुई थी
ये moral story पढ़ रहे है hindu story.com मे
श्याम के पिता के पास ज्यादा खेती होने से राम के पिता से अमीर थे लेकिन श्याम के पिता अनपढ और उसकी माता भी कभी स्कूल नहीं गई थी श्याम के पिता की जमीन ज्यादा थी तो वह उसी से अपना घर चलाते थे राम के पिता के पास जमीन नहीं थी तो वह श्याम के पिता की खेती में काम किया करते और अपना घर चलाया करते

राम और श्याम दोनों ही स्कूल जाया करते हैं और दोनों के स्कूल अलग-अलग थे राम सरकारी स्कूल में जाता और श्याम प्राइवेट स्कूल में जाता जहां पर अच्छा बैठने और पढ़ने को मिलता लेकिन श्याम के नंबर हमेशा राम के नंबर से कम आते

तो एक दिन श्याम के पिता ने राम के पिता से पूछा क्यों रामलखन मैं अपने बेटे को अच्छे स्कूल में भेजता हूं फिर भी मेरे बेटे के नंबर तुम्हारे बेटे …