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सच्ची कहानी Moral story in hindi

                          सच्ची कहानी

यह कहानी एक सच्ची कहानी है हम आप सभी को hindu story.com में लेकर आए हैं इस कहानी में यह बताया गया है कि आखरी समय तक हमें हिम्मत नहीं आनी चाहिए ।
 यह कहानी यूपी के एक छोटे से गांव में रहने वाले लड़के की कहानी है यह कहानी शुरू होती है एक गरीब परिवार में रहने वाले लड़के से लड़के का नाम रामचरण था उसके पिता गरीब होने की वजह से रामचरण को 10th क्लास तक ही पढ़ा पाए उसके बाद घर की ज्यादा हालत बिगड़ जाने के बाद रामचरण की पढ़ाई बंद करनी पढी। अब उसको पैसा कमाने का कोई जरिया नहीं था एक दिन उसने सोचा कि मैं बाहर जा कर पैसा कमाऊंगा
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फिर क्या था अपने पिता से अनुमति लेकर घर से निकल दिया लेकिन रामचरण पहली बार वह बाहर निकला था वह अब पहली बार दिल्ली के लिए रवाना हो गया वह ट्रेन में बैठकर दिल्ली पहुंच गया रामचरण ने देखा लोगों के पास तो टाइम ही नहीं है सब जल्दी- जल्दी में हैं रामचरण ने एक ढेले वाले से ब्रेड पकोड़ा खाया और पूछा भाई साहब यहां काम कहां मिलेगा ढेले वाले ने पूछा क्यों बेटे तुम पहली बार दिल्ली आए हो रामचरण ने कहा हाँ फिर से ढेले वाले ने कहा बेटे यहां पर काम ढूंढना तो बड़ा ही मुश्किल है तुम कहो तो मैं एक कबाड़ वाली दुकान को जानता हूं मैं वहां पर काम लगा सकता हूं रामचरण ने कहा अरे भाई साहब अगर मुझे काम लगा देंगे तो आपकी बड़ी महान दया होगी । शाम हुई रामचरण ढेले  वाले के साथ कबाड़ वाली दुकान के मालिक के पास पहुंच गया और वहां पर रामचरण को काम मिल गया अब रामचरण को कबाड़ को ट्रक में लोड कराया  करता और उसके साथ लड़के और भी लगे थे रामचरण को उन लड़कों के साथ काम करने से उनके साथ दोस्ती भी हो गई ऐसा ही कई महीनों तक  काम चलता रहा एक दिन रामचरण ने सोचा क्यों ना मैं एक बार अपने गांव हो आता हूं अब मेरे पास कुछ रुपए भी हो गए हैं अगले दिन रामचरण ने अपने मालिक से बात की मुझे अपने गांव जाना है तभी मालिक ने कहा तुम्हारा महीना पूरा होने में 5 या 6 दिन रह गए हैं तुम महीना पूरा कर लो और तुमको सभी महीने के रुपए भी मिल जाएगे रामचरण ने कहा ठीक है रामचरण काम में लग गया अगले दिन एक आदमी कबाड़ वाले मालिक के पास पहुंचा तभी कबाड़ वाले मालिक ने सभी लड़कों को बुलाया और कहा यह एक फैक्ट्री के मालिक हैं तुम सब को लेने आए हुए हैं और तुम को पैसा भी बहुत अच्छा देंगे तुम सब को उनके साथ चले जाना चाहिए तभी रामचरण ने कहा कि मुझे तो अपने गांव जाना है मालिक ने कहा बेटे ऐसा काम तुम्हें फिर नहीं मिलेगा और तुम इनकी कंपनी में एक  या 2 महीने काम करने के बाद तुम अपने घर चले जाओगे तो तुम्हें दोबारा वहीं पर काम मिल जाएगा तभी रामचरण  सोंच मे पढ़ गया आखिर में रामचरण जाने के लिए मान गया और सभी लड़कों के साथ रामचरण उस कंपनी के मालिक के साथ उस कंपनी में पहुंच गया जिसमें लोहा बनता था लोहे को पिघलाकर नया लोहा बनता था फिर क्या था सभी लड़के उस काम को करने लगे लेकिन लड़कों को काम अच्छा नहीं लग रहा था तभी सभी लड़कों ने कहा क्यों ना हम यहां से चलते हैं तभी सभी लड़कों ने फैक्ट्री के सुपरवाइजर से बात की तो सुपरवाइजर ने छुट्टी देने से मना कर दिया सभी लड़के सोच में पड़ गए फैक्ट्री का मालिक 2 सप्ताह में रविवार को फैक्ट्री देखने आता था तभी सभी  लड़कों ने सलाह बनाई क्यों ना हम फैक्ट्री के मालिक से बात करते हैं आखिरकार वह रविवार का दिन आ गया सभी लड़के मालिक के पास गए

और वहां से जाने की छुट्टी मांगी तो मालिक ने कहा तुम यहां से नहीं जा सकते तभी रामचरन ने कहा क्यों हम यहां से नहीं जा सकते तब मालिक ने कहा बताया कि तुम सभी खरीद कर लाया तुमको कबाड़ वाले ने तुम सभी को बेच दिया है रामचरण को जोरो से झटका लगा और कहा क्या तुमने तो कहा था कि हम तुम्हें एक महीने के बाद गांव वापिस जाने देंगे और फिर मालिक ने कहा तुम यहां से कभी बाहर  नहीं जा सकते हो अगर किसी ने यहां से भागने की कोशिश की तो जान से जाओगे अब सभी लोग यहां से जाओ मालिक ने आवाज लगाई गार्ड ने सभी को बाहर कर दिया सभी के दिमाग में झटका साल लग गया था अब सभी लड़कों को दोपहर को खाना मिलता और दिन भर उनको एक बैग टगां देते और लोहे के टुकड़ों को बिनने  को भेज देते दिनभर उनसे काम कराते खाना तो फिर दोपहर को ही देते थे ऐसा कई सप्ताह तक चलता रहा सभी लड़के भूखे मरने लगे अब सभी लड़के सोंचने लगे कि हम यहां से बाहर कैसे निकले एक या दो बार फैक्ट्री से भागने की कोशिश की लेकिन वह बाहर नहीं जा पाए अब सभी लड़कों को लग रहा था कि हम यहां से बाहर नहीं निकल पाएंगे तभी रामचरण ने सब को हौसला बधाया और कहा हम सब लोग यहां से बाहर जरूर जाएंगे

कुछ दिनों के बाद एक दिन एक ट्रक में सरदार जी आए तभी रामचरण ने सरदार जी के पास पहुंचा और सरदार जी को पूरी कहानी बताई तभी सरदार जी ने कहा मैं अभी तो तुमको यहां से लेकर नहीं जा सकता क्योंकि मेरे ट्रक का वजन तौल के अंदरआता है अगर तुम यहां से बाहर जाना चाहते हो तो मैं तुम्हें अगली बार जरूर यहां से बाहर ले जा सकता हूँ तभी रामचरण ने कहा ठीक है सरदार जी तब तक ट्रक खाली हो चुका था और सरदार जी वहां से चले गए सरदार के जाने के बाद यह खुश खबरी सभी दोस्तों को बताने गया तो सब ने कहा तुम अगर यहां से चले जाओगे तो हम सभी लोग  यहां पर मारे  जाएंगे तभी रामचरण ने कहा ठीक है अब जाएंगे तो सभी बाहर जाएंगे कुछ दिनों बाद सरदार ट्रक लेकर दोबारा आया और रामचरण को ले जानेकेलिए कहा तभी राम जाने बाहर जाने से मना कर दिया अगर बाहर जाएंगे तो हम सभी लोग बाहर जाएंगे वरना नहीं जाएंगे तभी सरदार से रामचरण ने पूछा कि तुम मुझे बाहर कैसे ले जा सकते हो तो सरदार ने बताया कि देखो मैं तुम्हारे ही वजन का एक पत्थर लेकर आया हूं मैं इस पत्थर को यहां पर छोड़कर तुम्हें बैठा लेता तो मेरे टृक  का वजन बराबर ही रहता सरदार ने कहा अगर मैं तुम सबको यहां से लेकर गया तो मैं पकड़ा जाऊंगा
और सरदार जी वहां से ट्रक लेकर चले गए तभी फैक्ट्री के मालिक को पता चला तो उन सभी लड़कों को बुलाया और पूछा कि किसने यहां से भागने की कोशिश की है जिसने भी कोशिश की है वह इस भट्टी में कूद कर अपनी जान दे  वरना सबको इस भठ्ठी में फेंक दिया जाएगा

जैसे ही रामचरण ने एक कदम आगे बढ़ाया तो पीछे से रामचरण के दोस्त ने दौड़कर जलती हुई  भट्ठी मे छलांग लगा दी और वह जलकर मर गया यह सब रामचरण देख कर सोचने लगा कि मेरे दोस्त ने मेरी जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान दे दी तभी रामचरण ने कसम खायी  कि मैं यहां से सबको लेकर जाऊंगा फिर से मालिक ने कहा अगली बार कोई भी यहां से भागने की कोशिश की  वह जान से मारा जाएगा और वहां से मालिक चला गया अब वहां सभी लोग डरे हुए थे अगले दिन दोपहर का समय था तो सभी दोस्तो को बुलाया कि आज शाम को यहां से भागना है तभी दोस्त ने कहा कैसे भागेंगे रामचरण ने एक योजना बनाई कि हम लोग इस दीवार को फाँदकर जाएंगे कुछ घंटे बाद शाम हो गई तभी जितने भी लोग थे तो खाना खाने के लिए चले गए थे शाम के 8:00 बज चुके थे अंधेरा हो चुका था तभी रामचरण ने सभी दोस्तों को बुलाया एक दूसरे के ऊपर चढ़कर फैक्ट्री की दीवार को पार करके बाहर निकले जब रामचरण अकेले ही बचा तो सबने अपने पहने  हुए कपड़ों को जोड़कर रामचरण को पकड़कर दीवार पर  चढा लिया दीवार 15 फुट ऊंची थी दीवार के नीचे से एक बड़ा सा नाला बह रहा था सब ने एक-एक करके नाले में छलांग लगाई रामचरण सभी दोस्तों को लेकर नाले से चलने लगा नालेमें 24 घंटे पैदल चलते-चलते फैक्ट्री से बहुत दूर निकल गए लेकिन उनको तो लग रहा था कि अगर हम पकड़ गए तो हम जिंदा नहीं बचेंगे सभी लड़के नाले में 3 दिन तक चलते रहे फिर उस नाले से िकल कर बाहर निकले और एक ट्रेन पकड़ी जब वह ट्रेन में बैठ गए तो उनके दिल में जान में जान आई और उनको लगा कि अब हमारी जिंदगी बच जाएगी सभी लड़कों को रामचरण अपने घर ले गया और सब को रुपए दिए जिससे सब लोग अपने घर पहुंच सके और सभी लड़के अपने-अपने घर पहुंच गए

 इस कहानी से हमें यह पता चलता है कि आखरी समय तक हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए जिससे रामचरण ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी जिंदगी और अपने दोस्तों की जिंदगी बचायी

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गौतम बुध्द की सीख (Learning of Gautam Buddha)

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 तुम जाओ गांव के पास एक तालाब है वहां से इस घड़े में पानी भरकर ले आओ शिष्य आज्ञाकारी था वह तालाब के पास पहुंचा तो उसने देखा कि उस तालाब पर तो किसान अपने बैलों को स्नान करा रहे हैं 


और लोग तालाब पर कूद कूद स्नान कर रहे है इसके कारण तालाब का पानी तो गंदा था वह सोचने लगा कि इतना गंदा पानी गुरु जी को लेकर जाऊं तो कैसे जाऊं थोड़ी देर इंतजार किया फिर वह अपने गुरूजी के पास वापस पहुंच गया 


जहां गौतम बुध्द एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे और गौतम बुद्ध से कहा माफी चाहता हूं गुरुदेव मैं चाहता था पानी भरकर लाना लेकिन पानी इतना गंदा था कि मैं पानी भर कर नहीं ला पाया गौतम बुद्ध ने उससे कहा चलो अच्छा तुम भी यही आराम कर लो आधे घंटे बाद गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा 

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