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पानी और समय की कीमत. /. Water and time . motivational story



                       Water and time

ये कहानी एक किसान की है जिसका नाम लखन होता है उसका एक बेटा होता है बेटे का नाम अमित होता हैं 
अमित की उम्र 14 वर्ष की होती है और वह 10th class मे पढता है  एक बार की बात  
पिता का प्यार
किसान का बेटा


एक फसल कट चुकी होती है दूसरी फसल के लिए खेत मे पानी लगाना होता है तो लखन अपने बेटे से कहता है कि अमित तुम मेरे साथ चलना और पानी लगाने मे मेरी मदद करना, अमित चला जाता है 
खेत मे पानी चलने लगता है जब खेत आधा हो चुका होता है  तो लखन अपने बेटे से कहता है 

कि अमित तुम जाकर टूब्बेल बन्द कर आओ मुझे पाइप दूसरी ओर बिछाना है यहाँ पानी ज्यादा भर जाएगा  दो या तीन खेत छोडकर टूब्बेल  था जिससे पानी निकल रहा था टूब्बेल जाने के लिए खेतो की मेड थी

जिससे जाने पर टूब्बेल कुछ ज्यादा दूर पढ जाता था
अमित अपने पिता की  बात सुनकर खेतों के बीच से दौड़ पड़ता है जिस खेत से दौड़ता है उस खेत में बड़े-बड़े ढीले पड़े होते हैं और अमित पैरो में कुछ भी नही
पहने होता है और सभी खेतों को पार करके टुबेल पहुंच जाता है और ट्यूबेल जाकर बंद कर देता है और खेतों की मेड़ की रास्ता से वापस आ जाता है



किसान यह सब देख रहा होता है जब किसान पाइप को दूसरी ओर फैला देता है तो किसान अमित से कहता है कि बेटे अब टूब्बेल जाकर बन्द कर आओ फिर से अमित खेतों के बीच से दौड़ता हुआ जाता है अचानक से बड़े डेले में पैर लगने से अमित गिर जाता है और फिर से दौड़ का ट्यूबेल पहुंच जाता है और टूब्बेल चला देता है फिर से वह खेतों की मेड़ से वापस आ जाता है

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 जब खेत पूरा पानी से भर जाता है तो किसान फिर से कहता है कि बेटे ट्ूबेल बंद कर आओ अमित फिर से खेतों के बीच से दौड़ते हुए टूब्बेल पहुंच जाता है और अमित टूब्बेल बंद करके वापिस अपने पिता के पास पहुंच गया हर बार की तरह किसान यह सब देख रहा था इस बार किसान ने पूछा कि बेटे जब मैं तुम्हें टूब्बेल बंद करने को भेजता हूं तो तुम खेतों के बीच से डेलो से होकर क्यों  जाते हो तो अमित कहता है कि जब मै टूब्बेल बन्द करने जाता हूँ तो खेतो से होकर इसलिए जाता हूँ कि 


मै पानी की बचत कर सकूं और समय की क्योंकि पीने वाला पानी केवल 3% ही रह गया है और 97% पानी खराब हो चुका है जिससे पानी की कीमत बढ़ गई है इसलिए मैं टूब्बेल बंद करने के लिए खेतों के बीच से होकर जाता हूं

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यह सुनकर किसान खुश हो गया उसे लगा कि हां मेरा बेटा स्कूल पढ़ने जाता है और वह समय की कीमत भी समझ चुका है

"आज के समय में स्कूल में समय की कीमत तो समझाई जाती है लेकिन शिक्षा नहीं इसलिए बच्चों को स्कूल के बाहर कोचिंग के लिए जाना पढता है"

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 तुम जाओ गांव के पास एक तालाब है वहां से इस घड़े में पानी भरकर ले आओ शिष्य आज्ञाकारी था वह तालाब के पास पहुंचा तो उसने देखा कि उस तालाब पर तो किसान अपने बैलों को स्नान करा रहे हैं 


और लोग तालाब पर कूद कूद स्नान कर रहे है इसके कारण तालाब का पानी तो गंदा था वह सोचने लगा कि इतना गंदा पानी गुरु जी को लेकर जाऊं तो कैसे जाऊं थोड़ी देर इंतजार किया फिर वह अपने गुरूजी के पास वापस पहुंच गया 


जहां गौतम बुध्द एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे और गौतम बुद्ध से कहा माफी चाहता हूं गुरुदेव मैं चाहता था पानी भरकर लाना लेकिन पानी इतना गंदा था कि मैं पानी भर कर नहीं ला पाया गौतम बुद्ध ने उससे कहा चलो अच्छा तुम भी यही आराम कर लो आधे घंटे बाद गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा 

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