सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्रदर्शित

चुपचाप- Short film story in hindi

                           "चुपचाप"
"  चुपचाप सब हो जाता है होकर के करके गुजर जाता है ,वो शैतानी काला साया पीछे से आ जाता है ,गुर्दा के ऐसे फटता है जैसे बाज चिड़िया ले जाता है, बदन पर फर्क क्या ही पड़ेगा वो रूह में आग लगाता है ,चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है ,रास्ते पर इज्जत लुटती है रास्ता भी र्थथराता है आंख से आंसू नहीं गिरता कुछ लहू सा  टपक जाता है, चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है, मिलता उसको इंसाफ यहां जो इसके लिए लड़ जाता है, उसके जख्म नासूर बने जो अपने जख्म छुपाता है, चुपचाप सब हो जाता है वह करके गुजर जाता है  "
यह कहानी रुनझुन की मां की कहानी है मां का नाम गीता था रुनझुन के पिता का नाम रजत था यह कहानी शुरू होती है रुनझुन के घर से रुनझुन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी तभी रजत ने टीवी ऑन कर दी इसमें   एक बलात्कार की खबर आ रही थी तभी रजत ने गीता से कहा सुनो रुनझुन का शाम 7:00 बजे का ट्यूशन बंद करा दो कहीं हमारी रुनझुन के साथ कुछ गलत ना हो जाए तो तुम साथ उसे कोचिंग छोड़ने और लेने जाना और रजत ऑफिस चला गया था है 

गीता भी रुनझुन को स्कूल ले जाती…

गौतम बुध्द की सीख (Learning of Gautam Buddha)

एक बार की बात है गौतम बुद्ध अपने  शिष्यों के साथ एक गांव से गुजर रहे थे  तभी गौतम बुद्ध को अचानक से प्यास लगी उन्होंने अपने शिष्य से कहा हम सभी लोग इस पेड़ के नीचे आराम कर रहे हैं
गौतम बुद्ध


 तुम जाओ गांव के पास एक तालाब है वहां से इस घड़े में पानी भरकर ले आओ शिष्य आज्ञाकारी था वह तालाब के पास पहुंचा तो उसने देखा कि उस तालाब पर तो किसान अपने बैलों को स्नान करा रहे हैं 


और लोग तालाब पर कूद कूद स्नान कर रहे है इसके कारण तालाब का पानी तो गंदा था वह सोचने लगा कि इतना गंदा पानी गुरु जी को लेकर जाऊं तो कैसे जाऊं थोड़ी देर इंतजार किया फिर वह अपने गुरूजी के पास वापस पहुंच गया 


जहां गौतम बुध्द एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे और गौतम बुद्ध से कहा माफी चाहता हूं गुरुदेव मैं चाहता था पानी भरकर लाना लेकिन पानी इतना गंदा था कि मैं पानी भर कर नहीं ला पाया गौतम बुद्ध ने उससे कहा चलो अच्छा तुम भी यही आराम कर लो आधे घंटे बाद गौतम बुद्ध ने शिष्य से कहा 

ये भी पढे़- पानी और समय की कीमत. /. Water and time . motivational


तुम जाओ इस घड़े में तालाब से पानी भरकर ले आओ बहुत तेज प्यास लगी है शिष्य फिर से तालाब पर पहुंचा तो उसने देखा कि तालाब में जो मिट्टी थी और जो गंदगी थी वह नीचे बैठ चुकी थी पानी साफ हो चुका था 


फिर क्या था शिष्य ने पानी घड़े में भरा और गौतम बुद्ध के पास पहुंचा और शिष्य बोला गुरुदेव मैं समझ नहीं पाया कि गंदा पानी साफ कैसे हो गया गौतम बुद्ध ने कहा यह बात तो मैं तुम को समझाना भी चाहता था गौतम बुद्ध ने कहा 


जिस तरह तालाब का पानी आधे घंटे में साफ हो गया मिट्टी नीचे बैठ गई ठीक ऐसे ही हमारा दिमाग हैं कई बार हम बहुत सारी मेहनत करते हैं और लगे रहते हैं की सफलता मिले लेकिन उस वक्त हम यह ध्यान नहीं देते कि हमारा जो दिमाग है वह परेशान है 

ये भी पढे़ -
एक माँ की motivational story




इसलिए हम चाहे जितना जोर लगा ले लेकिन काम में सफलता नहीं मिलती इसलिए हमें अपने दिमाग को कुछ देर तक आराम करने देना चाहिए और कुछ देर के बाद उस काम को करना शुरू करना चाहिए और इसके बाद आपको सफलता जरूर मिलेगीं

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट