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चुपचाप- Short film story in hindi

                           "चुपचाप"
"  चुपचाप सब हो जाता है होकर के करके गुजर जाता है ,वो शैतानी काला साया पीछे से आ जाता है ,गुर्दा के ऐसे फटता है जैसे बाज चिड़िया ले जाता है, बदन पर फर्क क्या ही पड़ेगा वो रूह में आग लगाता है ,चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है ,रास्ते पर इज्जत लुटती है रास्ता भी र्थथराता है आंख से आंसू नहीं गिरता कुछ लहू सा  टपक जाता है, चुपचाप सब हो जाता है होकर करके गुजर जाता है, मिलता उसको इंसाफ यहां जो इसके लिए लड़ जाता है, उसके जख्म नासूर बने जो अपने जख्म छुपाता है, चुपचाप सब हो जाता है वह करके गुजर जाता है  "
यह कहानी रुनझुन की मां की कहानी है मां का नाम गीता था रुनझुन के पिता का नाम रजत था यह कहानी शुरू होती है रुनझुन के घर से रुनझुन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी तभी रजत ने टीवी ऑन कर दी इसमें   एक बलात्कार की खबर आ रही थी तभी रजत ने गीता से कहा सुनो रुनझुन का शाम 7:00 बजे का ट्यूशन बंद करा दो कहीं हमारी रुनझुन के साथ कुछ गलत ना हो जाए तो तुम साथ उसे कोचिंग छोड़ने और लेने जाना और रजत ऑफिस चला गया था है 

गीता भी रुनझुन को स्कूल ले जाती…

एक माँ की motivational story



          एक माँ की motivational story


  • ये कहानी एक माँ की है जो अपने बेटे से बहुत प्यार करती थी माँ हमेशा यह सोंचती थी की बेटा अपने पैरो मे खडा हो जाए

Mother of son hindustory

कुछ दिनो बाद उस लडके की पानी वाले जहाज मे job {नौकरी} लग गयी वह एक से दो लाख रूपये महीना कमाने लगा एक दिन की बात है उसकी माँ ने कहा कि भी समुद्र घूमने जाऊगी तो लडके ने कहा ठीक है चलो

जब जहाज बीच समुद्र मे पहुचा तो कुछ कारण से जहाज डूबने तभी उस लडके ने अपनी माँ से कहा अगर तुम मेरे साथ नही आती तो ये जहाज सायद नही ढूबता तब तक कि जहाज आधा ढूब चुका था तभी उस लडके ने देखा कि कुछ ही दूर पे एक टापू है

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वह एक लकडी के टुकडे मे माँ को बैठाकर उस टापू तक ले आया और अपनी माँ को छोडकर टापू के दूसरे किनारे मे पहुच गया तभी भगवान से कहने लगा हे भगवान खाने के लिए जुगाढ बना दे कुछ देर बाद कुछ बंदर उसे खाने के लिए कुछ फल ले आते

अगले दिन भगवान से कहने लगा कि रहने के लिए कुछ जुगाढ कर दे तभी कुछ देर बाद एक तैरता हुआ एक तम्बू वहाँ पर पहुच जाता है और उस तम्बू को गाड़कर रहने लगता है कुछ दिन बाद भगवान से कहने लगता है कि

 तूने मुझे खाने के लिए और रहने के लिए दे दिया अब किसी लडकी को भेज देता तो मै शादी कर लेता और मेरी जिंदगी कट जाती तब अगले दिन एक लडकी तैरते हुए वहाँ पहुच जाती है और वो दोनो शादी कर लेते है कुछ दिनो बाद फिर से भगवान से कहता है की


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मुझे सब कुछ दिया बस अब मुझे एक नाव भेज दे जिससे मै अपने घर जा सकू । अगले दिन एक नाव भी आ जाती  है जिसमे दोनो लोग जाने लगते है और भगवान को धन्यवाद कहने लगता है और वहाँ से चल देता है तभी ऊपर से आकाश वाणी होतीहै कि

 तुम अपनी माँ को लेकर नही जाओगे जो टापू के दूसरे किनारे मे है तब लडका कहता है कि आज तक कभी उसकी दुआ पूरी हुई है क्या , आज तक मैने जो माँगा सब कुछ मिल गया उसकी तो किस्मत ही खराब है अगर उसे लेकर जाऊगा

 तो सायद मै भी अपनी मंजिल पर न पहुच पाऊ  तो जब वो ऐसा तभी दोबारा से आकाश वाणी होती है तुम्हे पता है कि तुम्हारी सभी दुआए क्यू कबूल हुई तो लडका बोलता है  कि मुझे नही पता मुझे सब कुछ क्यू मिल गया ,

तू हमेशा यह माँगता रहा मुझे ये वो मिले मगर तुम्हारी माँ हमेशा यह माँगती रही  मेरी दुआए पूरी हो या न हों
लेकिन मेरे बेटे की सारी दुआए पूरी हो और आज तू उसे छोड़कर जा रहा है

   

हम भी जिंदगी मे अपने बारे में सोंचना शुरु कर देते है मुझे मिलता रहे और हम दूसरो के लिए हम सोंचना छोड़ देते है जब कि जिन्दगी मे जो कुछ हो रहा सायद लोगो की दुआओ की वजह से हो

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