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कंजूस आदमी

एक आदमी का नाम था रामचंद्र रामचंद्र तो मस्ती में पड़ गया था लेकिन वह पैसे से बहुत कंजूस था 1 दिन उसकी पत्नी ने कहा कि हरिद्वार ही चले जाओ कभी तो तुम दान पुन करते नहीं हो 

तो उस आदमी ने कहा कि मेरे घर से हरिद्वार 20 किलोमीटर दूर है बस में जाऊंगा या ट्रेन में जाऊंगा तो रुपया लगेगा तो पत्नी ने कहा कि पैदल ही चले जाओ 
हरिद्वार घाट

तो उस आदमी ने कहा कि हां यह बात तो ठीक है जब वह आदमी घर से निकला तो सोचने लगा कि नहाने जाऊंगा तो साधु संत मिलेंगे तो पैसा देना पड़ेगा सोचते सोचते दिमाग में आया कि मुर्दा घाट चला जाऊं तो वहां तो कभी कभी कोई साधु संत आते हैं

 भगवान ने देखा कि कंजूस आदमी मुर्दा घाट में पाप धोने आया है जैसे ही उस आदमी ने गंगा जी में डुबकी लगाई तो भगवान जी   संत का रूप लेकर प्रकट हो गए वह आदमी जैसे ही बाहर निकला तो सामने देखा कि संत । 

संत बोले जजमान की जय हो आदमी बोलता है कि तुम कौन हो भगवान बोलते हैं कि मैं संत हू आदमी बोलता है कि तुमने तो मुर्दा घाट भी नहीं छोड़ा भगवान बोलते हैं कि वैसे तो हम संतोषी संत हैं जो रोज आते नहीं हैं कभी-कभी आते हैं 

तुम्हारे जैसे कोई जजमान मिल जाते हैं तो साल 2 साल का खाना पीना दे जाते हैं क्या बोला तुमने साल 2 साल का अरे हम तो महीने भर का भी नहीं दे सकते भगवान बोलते हैं कि अरे 1 दिन का। तो आदमी बोलता है नहीं तो भगवान बोलते हैं कि तुम्हें तो कुछ देना पड़ेगा नहीं तो हम तुम्हे यहाँ से जाने नहीं देंगे

 तो आदमी बोलता है कि फिर  एक काम करो एक रुपया  ले लो भगवान समझ रहे है कि देखो कितना कंजूस आदमी है भगवान ने कहा ठीक है एक रुपया  ही दे दो तो आदमी बोलता है कि अभी मेरे पास नहीं है उधार रहा भगवान ने कहा ठीक है उधार ही सही । दे तो उस आदमी ने कहा कभी होगा तो एक रुपया  दे देंगे 

अब आदमी घर चला गया घर पहुंचा ही था तो बाहर से दरवाजा  खटखटाया तो उस आदमी की पत्नी ने दरवाजा खोला तो भगवान बोले जजमान की जय हो पत्नी अंदर गई संत से कुछ बोल आए थे तो पति बोलता है कि हां तो पत्नी बोलती है वह बाहर खड़े हैं 

तो पति ने कहा के बाहर जा कर कह दो कि तबीयत ठीक नहीं है तो पत्नी बाहर गई और संत से बोली कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है तो संत बोले कि जजमान की स्वास्थ्य खराब है तो हम बाहर घूमे यह शोभा नहीं देता ।

हम यहीं रहेंगे तीन-चार दिन जब तक उनकी तबीयत ठीक नहीं हो जाती हम यही रहेंगे जब उनकी तबीयत ठीक हो जाएगी हम मिलकर चले जाएंगे । पत्नी फिर से अंदर गई संत तो बैठ गया है तो पति बोलता है कि कह दो जाकर की गुजर गए हैं

 पत्नी झूठा झूठा बोलती हुई आई मेरे तो प्राणनाथ चले गए भगवान बोले जजमान मर गए तो पत्नी बोली हां तो संत बोले तुम कहां अकेली औरत गांव वालों को बुलाती फिर होगी चलो मैं ही बुला आता हूं 

पत्नी जब तक रूकती संत चला गया और पूरे गांव में ढिंढोरा पीट दिया कि रामचंद्र चले गए धीरे धीरे गांव वाले इकट्ठा होने लगे अब वह आदमी सांस रोके हुए लेटे रहा लोग आए और भगवान जी भी बैठ गए कि अब उठ जाएगा अब उसे बांध लिया गया

 जाने की तैयारी होने लगी पत्नी जोर जोर से बोलने लगी ये मरे नहीं है तो लोगों ने बोला कि यह तो तुम्हारा मोंह है अब उसको ले गए श्मशान घाट और चिता पर रख दिया भगवान सोचने लगे कि अरे यह बेवकूफ आदमी यह अभी भी आंख बंद करके लेटा है 

भगवान को लगा कि यह मर जाएगा लेकिन यह पैसे नहीं देगा भगवान बोले कि हम रामचन्द्र के कान में कुछ कहना  चाहते है तो लोगों ने कहा ठीक है आप ही  संत जी कहो भगवान गए कहा कि मैं भगवान हूं अब तो तुम आंख खोल लो तो आदमी ने आंखें खोली तो देखा कि वही संत खड़ा है और फिर से आंख बंद कर ली 


 भगवान बोले की सारी दुनिया हमसे हारती है हम तुमसे हार गए आंखें खोल ले और बोल तू क्या मांगता है तो आदमी बोलता है कि चले जाओ एक रुपया छोड़ कर 

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